मौदहा (हमीरपुर)। सूफी संत हजरत हकीम अब्दुल्ला शाह बाबा निजामी रहमतुल्लाह अलैह के 63वें सालाना उर्स मुबारक में आस्ताने पर अकीदतमंदों का सैलाब उमड़ पड़ा। भले ही रुक-रुक कर हुई बारिश ने मेले की रौनक में खलल डालने की कोशिश की, लेकिन श्रद्धालुओं का जोश देखते ही बन रहा था। पूरा कम्हरिया गांव “या निजामी बाबा” के नारों से गूंज उठा।
उर्स के पहले दिन बुधवार की रात दरगाह परिसर में शानदार ऑल इंडिया नातिया मुशायरा आयोजित हुआ, जिसमें देशभर से आए नामचीन शायरों ने अपने नातिया कलाम से समां बांध दिया। शायर जनाब शकील आरफ़ी, कारी जमशेद जौहर, फैसल मेरठी, असद आज़मी, शमशेर जहानागंजी और मकामी शायर अब्रार दानिश ने जब अपने कलाम पेश किए तो श्रोताओं ने बार-बार “वाह वाह” और “माशाअल्लाह” की गूंज से आस्ताने को महका दिया।
खास तौर पर हाफिज असद आज़मी और शमशेर जहानागंजी के कलामों ने लोगों के दिलों को छू लिया और देर रात तक मुशायरे का माहौल जादुई बना रहा। मुशायरे की सदारत दरगाह के सज्जादानशीन हाफिज वली मोहम्मद और हाफिज लाल मोहम्मद निजामी ने की, जबकि निजामत का फर्ज़ कलीम दानिश कानपुरी ने अदा किया।
दूसरे दिन गुरुवार को सुबह आस्ताने में कुरानख्वानी के बाद दिनभर लंगर का सिलसिला जारी रहा, जिसमें हजारों जायरीनों ने हिस्सा लिया। दोपहर में बाबा के पैतृक मकान से निकली कदीमी चादर जब जुलूस के रूप में मोहाल भ्रमण करती हुई आस्ताने पहुंची, तो लोगों की भीड़ ने “निजामी बाबा जिंदाबाद” के नारों से माहौल को रूहानी बना दिया।
रात में आयोजित कव्वाली प्रोग्राम ने उर्स की रौनक को नई ऊँचाई दी। रामपुर से आए मशहूर कव्वाल मोहम्मद अहमद और शाहजहांपुर के राजू मुरली ने जब अपनी मधुर आवाज में सूफियाना कलाम पेश किए तो महफिल झूम उठी। देर रात तक चली कव्वालियों में लोग झूमते, थिरकते और दरगाह की रूहानी फिजा में डूबे नजर आए।
इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतज़ाम रहे। पुलिस प्रशासन और मेला कमेटी के वालंटियर जगह-जगह तैनात रहे और भीड़ को नियंत्रित करने में सक्रिय भूमिका निभाई। उर्स का यह सिलसिला तीसरे दिन भी जारी रहेगा, जिसमें लंगर, चादरपोशी और कव्वालियों के कार्यक्रमों के साथ उर्स की रौनक अपने चरम पर होगी।





