किसान संगठनों से संघर्ष समिति ने की वार्ता
गोरखपुर। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, गोरखपुर ने कहा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण कर निजी कंपनियों की मनॉपली बनाई जा रही है जो किसी भी तरह जनहित में नहीं है।
संघर्ष समिति गोरखपुर के सहसंयोजक इंजीनियर जितेन्द्र कुमार गुप्त ने कहा कि भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा 09 अक्टूबर को जारी ड्राफ्ट इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के प्राविधानों के अनुसार विद्युत वितरण के क्षेत्र में निजी कंपनियों को सरकारी बिजली कंपनियों का इन्फ्रा इस्तेमाल करने की छूट दे कर निजी कंपनियों को विद्युत वितरण का लाइसेंस देना भी किसानों और आम उपभोक्ताओं के हित में नहीं है। इसका भी सशक्त प्रतिकार किया जाएगा।
संघर्ष समिति गोरखपुर के संयोजक इंजीनियर पुष्पेन्द्र सिंह ने कहा कि निजीकरण के जरिए बिजली महंगी कर किसानों और आम उपभोक्ताओं को लालटेन युग में ले जाने की तैयारी है जिसके विरोध में बहुत सशक्त आन्दोलन चलाने हेतु शीघ्र ही किसान संगठनों के साथ संयुक्त कार्यक्रम बनाया जाएगा। इस सम्बन्ध में संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने आज संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों डॉ दर्शन पाल और हन्नान मूला से दूरभाष पर चर्चा की है।
संघर्ष समिति ने निर्णय लिया है कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में विगत 318 दिन से लगातार चल रहे आंदोलन के साथ ही ड्राफ्ट इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में भी आंदोलन चलाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की केन्द्रीय कोर कमेटी की मीटिंग आगामी 04 एवं 05 नवम्बर को मुम्बई में हो रही है। इस बैठक में उप्र में किए जा रहे बिजली के निजीकरण और ड्राफ्ट इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में राष्ट्रव्यापी आन्दोलन का निर्णय लिया जायेगा।
संघर्ष समिति गोरखपुर के संरक्षक इस्माइल खान ने कहा कि नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के निर्णय के अनुसार उप्र के बिजली कर्मी 11 माह से चल रहे आंदोलन को और तेज करेंगे।
संघर्ष समिति गोरखपुर के कार्यवाहक संयोजक इंजीनियर जीवेश नन्दन ने कहा कि अवैध ढंग से नियुक्त ट्रांजेक्शन कंसल्टेंट मेसर्स ग्रांट थॉर्टन द्वारा बनाए गए आर एफ पी डॉक्यूमेंट के अनुसार एक लाख करोड रुपए की पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों को मात्र 6500 करोड रुपए की रिजर्व प्राइस में बेचने की तैयारी है। इसके अतिरिक्त उप्र में विगत छह साल से आम उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरें नहीं बढ़ी हैं किन्तु निजीकरण होते ही उप्र में किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरों में तीन गुना से अधिक वृद्धि की तैयारी है।
संघर्ष समिति गोरखपुर के सहसंयोजक संदीप श्रीवास्तव एवं करुणेश त्रिपाठी ने कहा कि न ही लाखों करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के मोल बेचना जनहित में है और न ही निजीकरण के बाद बिजली दरों में बेतहाशा वृद्धि जनहित में है। संघर्ष समिति इसी के विरोध में संघर्षरत है।
संघर्ष समिति गोरखपुर के सहसंयोजक प्रभुनाथ प्रसाद एवं संगमलाल मौर्य ने कहा कि मल्टीपल लाइसेंसी के नाम पर निजी कंपनियों को सरकारी विद्युत वितरण निगमों का इन्फ्रा इस्तेमाल करने की छूट देने से किसानों और आम उपभोक्ताओं को सबसे बड़ा आघात पहुंचने वाला है।
ड्राफ्ट बिल के अनुसार सब्सिडी समाप्त कर दी जाएगी जिसका मतलब साफ है कि किसानो को 05 हॉर्स पावर के पम्प को छह घंटे चलाने पर कम से कम 12 हजार रुपए प्रति माह देने पड़ेंगे। इसी प्रकार गरीब घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बेतहाशा महंगी बिजली का संदेश लेकर आ रहा निजीकरण और मल्टीपल लाइसेंसी सिस्टम प्रदेश को लालटेन युग में ले जायेगा।
संघर्ष समिति निजीकरण के किसी भी स्वरूप को स्वीकार नहीं करती है और इसके विरोध में आन्दोलन तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।





