रीवा ज़िले के एक छोटे से गांव में कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरे गांव को भावुक कर दिया। 12 साल पहले लापता हुआ एक बेटा अचानक अपने घर लौटा। मां बरामदे में बैठी थी, दरवाज़े पर एक दुबला-पतला आदमी आया, बोला – “अम्मा… मैं सूरज।”
मां ने पहले तो ध्यान से देखा, फिर सिर हिलाकर बोली – “नहीं, मेरा सूरज ऐसा नहीं दिखता था।”
सूरज ने कांपते हाथों से मां के पांव छुए, जेब से एक पुरानी तस्वीर निकाली जिसमें वो 10 साल का बच्चा था, मां की गोद में बैठा हुआ। फोटो देखते ही मां का चेहरा सफेद पड़ गया और वो वहीं बेहोश हो गई।
गांव के लोग इकट्ठा हो गए, किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। सूरज 12 साल पहले मेले में खो गया था। तब से घरवाले उसे मरा हुआ मान चुके थे। कागज़ों में उसका नाम भी हट गया था।
लेकिन हकीकत ये थी कि सूरज को उस दिन किसी ने अगवा कर लिया था। पहले उसे उत्तर प्रदेश के एक होटल में बर्तन साफ़ करवाए गए, फिर दिल्ली ले जाया गया। वहां से वो किसी तरह भाग निकला और पंजाब में एक ढाबे पर काम करने लगा।
पिछले साल एक भले आदमी ने उसका आधार कार्ड बनवाया और तब जाकर वो अपने गांव का नाम ढूंढ पाया। नाम, गांव और स्कूल की कुछ यादें ही उसका सहारा बनीं।
वो घर लौटा तो था पर पहचान मिट चुकी थी।
गांववालों ने मिलकर गांव के मंदिर में सूरज के लिए पूजा रखवाई। मां ने आंखों में आंसू लिए बस इतना कहा, “अब मुझे और कुछ नहीं चाहिए… मेरा बेटा लौट आया है।”





