1900 करोड़ का घोटाला : आखिर क्यों इमामबाड़ा स्टेट वक्फ़ को लुटता देख खामोश रहे मियां साहब
अपने ही जवाब में फंसते नज़र आ रहे इमामबाड़ा स्टेट के मतवल्ली अदनान फर्रुख अली शाह “मियां साहब”
गोरखपुर। रोम जल रहा था और नीरो बांसुरी बजाता रहा । कुछ ऐसा ही नजारा प्रदेश के सबसे अधिक सम्पत्तियों वाले वक्फ नम्बर 67 इमामबाड़ा स्टेट के सज्जादानशीन अदनान फर्रुख अली शाह “मियां साहब” का है। 1900 करोड़ रुपये के घोटाले की सहायक वक्फ़ आयुक्त स्तर पर चल रही जांच में मियां साहब की तरफ से जो जवाब लगाया गया है उसके आधार पर तो यही कहा जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस इतने बड़े आरोप के बाद भी स्टेट अपनी उसी राह पर चलता दिख रहा है जो राह उसे इस करोड़ों के घोटाले तक लेकर आई है।
सहायक वक्फ़ आयुक्त कार्यालय द्वारा भेजे गए सम्मन का जवाब मियां साहब ने स्वयं न देकर अपने मुख्तारे आम, आबिद अली के माध्यम से दिया है। ऐसा लगता है कि भविष्य में इस बयान या जवाब से मुकरने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
बताते चलें कि बिल्डरों और भूमाफियाओं ने वक्फ़ नम्बर 67 गोरखपुर, यानी इमामबाड़ा स्टेट के मतवल्ली अदनान फर्रुख अली शाह से मिलकर इमामबाड़े की सम्पत्तियों का बंदरबांट किया। यह खुलासा सेंट्रल वक्फ कमेटी के सदस्य व उत्तर प्रदेश और झारखंड वक्फ बोर्ड के इंचार्ज और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता, डॉ0 सैयद एजाज अब्बास द्वारा सीएम योगी आदित्यनाथ को भेजे गए एक पत्र के माध्यम से हुआ था। इसी पत्र में सुन्नी वक्फ नंबर 67 इमामबाड़ा स्टेट की वक्फ़ संपत्तियों में 1900 करोड़ के घोटाले की बात कही गई है और इसी आधार पर जांच हो रही है।
सहायक वक्फ़ आयुक्त को भेजे अपने जवाब में इमामबाड़ा स्टेट के मुख्तारे आम आबिद अली ने जो जवाब दिए वो सारे जवाब एक तरफ लेकिन बिंदु संख्या 27 पर स्टेट की तरफ से जो जवाब दिया गया है वह गौर करने वाला है । जवाब में कहा गया है कि सवाल 27 से लेकर 55 तक के सवाल जो लिखे गए हैं वो हमारे मुतवल्ली सज्जादानशीन सैय्यद अदनान फारुख अली शाह के विश्वासपात्र व मुख्तारे आम रहे जमाल अहमद पुत्र इकबाल अहमद के द्वारा कूटरचित व कूटरचना के तहत किये गए हैं जिसकी जानकारी हमारे इमामबाड़ा स्टेट मुतवल्ली सज्जादानशीन को नही रही है, जानकारी होने पर उनकी मुख्तारी रद्द कर दी गई और मुतवल्ली स्वयं स्टेट के सभी काम पुरानी परंपरा के अनुसार देखने लगे।

अब सवाल यह उठता है कि एक, दो या दस नही पूरे 28 मामलों में जवाबदेह एक ऐसे व्यक्ति को बनाया गया जिसमें अरबों रुपयो की वक्फ़ सम्पत्ति की हेर फेर हुई और जब मामला जानकारी में आया तो केवल मुख्तारी रद्द कर दी गई।
इस सम्बन्ध में इमामबाड़ा स्टेट के मुतवल्ली सज्जादानशीन अदनान फर्रुख अली शाह से उनकी कोठी पर कई बार सम्पर्क करने की कोशिश किया लेकिन उनसे मुलाक़ात नही हो सकी।
बहरहाल आखिर क्या वजह रही कि इतने बड़े मामले में इमामबाड़ा स्टेट की ओर से इस घोटाले की कोई एफआईआर दर्ज नही करायी गई ?
करोड़ो की सम्पत्ति आखिर क्यों कौड़ियों के भाव बेची या पट्टे पर दी गई ?
कूटरचित दस्तावेज़ के आधार पर स्थानांतरित की गई वक्फ़ की सम्पत्ति दोबारा हासिल करने का प्रयास क्यों नही किया गया ?
क्या पूर्व मुख्तारे आम जमाल अहमद और मियां साहब के बीच कोई खामोश सौदा हुआ था ?

मन्नवर रिज़वी की रिपोर्ट
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