
राज्य विद्युत नियामक आयोग गुरुवार को ने बिजली दरों का ऐलान करेगा. कहा जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की दरों में 150 फीसदी तक बढ़ोत्तरी संभव है. जबकि शहरी उपभोक्ताओं की जेब 12 फ़ीसदी का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है. यही नहीं गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लाइफ लाइन उपभोक्ताओं को 150 यूनिट की जगह अब 100 यूनिट बिजली ही रियायती दर पर मिलेगी.
इन दिनों योगी सरकार मिशन पॉवर फ़ॉर ऑल के तहत अक्टूबर 2018 तक यूपी के हर घर को 24 घंटे बिजली देने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर जुटी हुई है. इसके लिए सरकार बिजली चोरी से लेकर मीटर वाले कनेक्शन को लेकर गंभीर दिख रही है. इस बढ़ोत्तरी से उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत होगी जिनके यहां मीटर नहीं लगा है.
मसलन ग्रामीण इलाकों में 180 रुपए महीने के हिसाब से बिजली बिल लिया जाता है. जिसकी वजह से बिजली का दुरूपयोग भी होता है. अब उन्हें भी मीटर लगाने के लिए कहा जा रहा है. अगर वे मीटर नहीं लगाते हैं तो उन्हें 600 से 700 रुपए प्रति महीने के हिसाब से बिजली बिल देना होगा.
मौजूदा समय में बिजली विभाग करीब 75 हजार करोड़ के घाटे से जूझ रही है. यूपी के उर्जा विभाग की बिजली कंपनियों द्वारा विधुत नियामक आयोग को काफी फहले ही विधुत दरों में वृद्धि में एक व्यापक बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव भेजा जा चुका है. जिस पर आयोग ने भी सहमति है.
ग्रामीण क्षेत्र की बिजली दरों में एक बड़ी वृद्धि के साथ शहरी और औधिगक क्षेत्र की बिजली दरों में भी बढ़ोत्तरी की जा सकती है. जिसकी घोषणा बुधवार को तीसरे चरण का मतदान खत्म होने के अगले दिन 30 नवंबर को की जा सकती है.
हालांकि नियामक आयोग ने ये भी साफ कर दिया है कि ग्रामीण, शहरी और औधोगिक क्षेत्र की बिजली दरों में वृद्धि बिजली कंपनियों द्वारा भेजे गए मनमाने प्रस्ताव के तहत नहीं की जाएगी. ग्रामीण इलाकों की बिजली दरों में वृद्धि बिजली पहुंचाने के लिए आने वाली कम से कम बिजली की खरीद लागत के मुताबिक ही होगी.
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