लखनऊ में लिंगानुपात गिरा, एक हजार लड़कों पर रह गई 890 लड़कियां
आज भी हिन्दुस्तान की महिलाएं बेटे के लिए ही व्रत रखती है :एडवा
पीसीपीएनडीटी एक्ट की स्थिति पर हुई परिचर्चा

लखनऊ। राजधानी के प्रेस क्लब में शुक्रवार को अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ” एडवा” ने पीसीपीएनडीटी एक्ट की उत्तर प्रदेश में स्थिति को लेकर परिचर्चा का आयोजन किया। एडवा की मधु गर्ग ने कहा कि पितृसत्तात्मक मानसिकता के कारण बेटा बेटी में सदैव भेदभाव होता आया है। आज भी हिन्दुस्तान की महिलाएं बेटे के लिए व्रत उपवास रखती है और इसी सोच की वजह से मेडिकल टेक्नोलॉजी का दुर्पयोग कर बेटियों को कोख में ही मार दिया जा रहा है। नेशनल हेल्थ सर्वे के अनुसार वर्ष 2015-16 में उत्तर प्रदेश में लिंगानुपात में भारी अंतर आ गया है। उन्होंने बताया कि इस समय प्रति 1 हजार लड़कों पर 19 अंको की गिरावट लड़कियों की संख्या में आ गई है जिसमें जनपद वार अलग अलग आंकड़े उपलब्ध हुए हैं। बेटियों की सुरक्षा के लिए सरकार बड़े बड़े दावे करती है पर सच्चाई कुछ और ही है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के साथ पीसीपीएनडीटी एक्ट लागू किया गया था लेकिन गर्भ में ही बच्चियों की हत्या कर दी जा रही है। योगी सरकार ने बड़े जोश से प्रदेश में मुखबिर योजना शुरू की थी लेकिन वह भी असरदार साबित हुई।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के अनुसार यूपी में लगातार लिंगानुपात बढ़ता जा रहा है। जालौन में 1000/653, 4 जिलों में लड़कियों का अनुपात 720-799, 27 जिलों में 800-899 है और यहां तक कि राजधानी लखनऊ में लिंगानुपात 1000/870 हैं तो बाकी प्रदेश का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
पीसीपीएनडीटी एक्ट को लागू करने में जिला स्तर पर अनियमितता नजर आती है क्योंकि कई जगहों पर 2012 से आज तक मीटिंग नहीं हुई है जबकि नियमानुसार ये मीटिंग 2 महीने में एक बार होनी चाहिए। यही स्थिति राज्य स्तरीय सुपरवाइजरी बोर्ड की है जहां नियमानुसार 4 महीने में एक बार मीटिंग होनी चाहिए पर यहां आखरी बैठक अप्रैल 2015 में हुई थी। उदासीनता का पता एक और बात से चलता है कि यूपी में आज तक पीसीपीएनडीटी सेल का गठन ही नहीं हो पाया है। कोर्ट में भी उत्तर प्रदेश की बड़ी बुरी स्थिति है जहां केवल 7 लोगों को भ्रूण हत्या में आरोपी बनाया गया और उसमें से भी 5 को जुर्माना लेकर छोड़ दिया गया।
मधु गर्ग ने बहराइच, बरेली के मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि एडवा ने कई बार सरकार को भ्रूण हत्या, अल्ट्रासाउंड सेंटर आदि की जानकारियां दी पर कार्यवाही कभी नहीं हुई। योगी सरकार को कन्या भ्रूणहत्या रोकने के लिए गंभीर न बतातें हुए कहा कि जब तक दृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति का अभाव रहेगा तब तक प्रदेश में बेटियों की सुरक्षा नहीं की जा सकेगी|
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