बाढ़ पीड़ितों का दर्द: बिखरे आशियानें सिसकते लोग, देखें हकीकत
रुदौली(फैजाबाद) : घाघरा नदी की त्रासदी में अपना सब कुछ गंवा चुके पाढ़ पीड़ित दर्ज नों परिवारों को डेढ़ दशक का लम्बा समय बीत जाने के बाद भी ठौर नसीब नहीं हुआ। सरकार व प्रशासन के पुनर्वास के दावे यहाँ दम तोड़ रहे हैं। इनके गाँव में आबाद होने के सपने रौनाही तट बंध के इर्द गिर्द सिमट कर रह गये हैं।

बाढ़ पीड़ितों की परेशनी उन्ही की जुबानी :
फूस नुमा घरों में तटबंध के किनारे रह रहे चक्का के सुहेल, राम उजागिर,अल्लाहनवाज गंजहा का पुरवां के लक्ष्मीप्रसाद, जगदम्बा,अहरौली के राम अवसान, नन्कू प्रसाद,आदि दर्जनों परिवारों के लोगों ने बताया कि यहां असहायों की तरह अपनी जिंदगी वितीत कर रहे हैं। तहसील प्रशासन ने इन नदी में समाहित हुए गाँव को गैर आबाद घोषित कर दिया है। यहाँ बाढ़ के समय तक ही बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थान पर पर बसाने की बात प्रशासन के लोग करते हैं। लेकिन अब तक इस कार्य को पूरा करने पर अमल नहीं किया गया।
घाघरा की धारा में अपना वजूद खो चुके गाँव :
ज्ञात हो कि 2004-5 में घाघरा नदी की कछार में आबाद चक्का पुरवां ,अहरौली, गंजहा का पुरवां मजरे सरांय नासिर आदि गाँव धारा की जद में आ कर घाघरा नदी में समाहित हो गये थे। गाँव के लोग बिखर गये। उस हाहाकार में जान बचा कर जिसे जहाँ स्थान मिला वहीं रहने लगा। प्रशासन ने इन बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थान पर बसाने का अश्वासन देने के साथ भूमि तलाशे जाने की कवा यद भी शुरू की लेकिन यह कवायद आज भी अधूरी है।
तहसीलदार राम जनम यादव से जब हमने इस बारे पे पूछा तो उनका कहना था कि
“तराई क्षेत्र के कई ग्राम प्रधान इन बाढ़ पीड़ितों को अपने गाँव में बसाना नहीं चाहते हैं। तहसील प्रशासन इन बाढ़ पीड़ितों के लिए सुरक्षित जगह तलाश करने का कार्य रहा है।
रौनाही तटबंध स्थिति अहरौली गाँव के सामने रह रहे बाढ़ पीड़ित।
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