
पीएम ने कहा कि हमने गुजरात में पानी की हर एक बूंद सहेजने का काम शुरू किया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पानी की कमी के बदतर नतीजों के बारे में हम अच्छी तरह जानते हैं। हमारे लिए विकास केवल चुनाव जीतना नहीं बल्कि हर व्यक्ति की सेवा करना है।
पीएम ने गुजरात में आए भूकंप को याद करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि जब इंदिरा गांधी जी मोरबी आईं थीं, मुझे याद है एक चित्रलेखा मैगजीन में उनकी फोटो थी जिसमें वो बदबू की वजह से मुंह पर रुमाल लगा रखा था, लेकिन हमारे जनसंघ और आरएसएस कार्यकर्ता मोरबी की सड़कों पर थे, यह इंसानीयत की महक है।
बता दें कि पीएम मोदी आज फिर राज्य में चार रैलियों को संबोधित करेंगे। पीएम की यह रैलियां सोमनाथ के आसपास के इलाकों में होंगी। जानकारी के अनुसार मोदी आज सौराष्ट्र के मोरबी और प्राची इलाके के अलावा भावनगर और नवसारी में जनसभाओं को संबोधित करेंगे। वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी भी आज गुजरात के सौराष्ट्र में होंगे और सोमनाथ मंदिर में दर्शन करेंगे।
मोदी के अस्मिता-इमोशनल कार्ड को मुखर हो कर थामेगी कांग्रेस
गुजरात चुनाव में इस बार सब कुछ झोंकने के साथ बेहद सावधानी बरत रही कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के धुंआधार सियासी प्रहार को थामने के लिए मैदान में उतर गई है। मोदी के गुजराती अस्मिता के साथ इमोशनल कार्ड का दांव चलने का पहले से ही अंदाजा लगा रही पार्टी ने उनके वार का तथ्यों से जवाब देने की रणनीति अपनाने का फैसला लिया है। इसके लिए पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता मोर्चा संभालने के लिए मैदान में उतर गए हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी खुद सोमनाथ मंदिर में दर्शन के बाद अस्मिता दांव को चुनौती देंगे।
राहुल की सोमनाथ में तो कोई सियासी सभा नहीं होगी मगर मंदिर में दर्शन और स्वागत के बाद वे जूनागढ़ और अमरेली जिले की अपनी सभाओं के दौरान प्रधानमंत्री पर वार का मोर्चा खोलेंगे। हालांकि मोदी पर निजी हमला करने से कांग्रेस बचेगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, गुजरात के मैदान में उतारे जा रहे नेताओं को भी मोदी पर निजी आक्षेप लगाने से बचने की सलाह दी गई है।
युवा कांग्रेस के एक कार्यकर्ता की चाय वाली विवादित टिप्पणी से हुए सियासी बवाल को देखते हुए पार्टी चुनाव अभियान के इस उफान में प्रधानमंत्री और भाजपा को इमोशनल कार्ड का दांव सिरे चढ़ाने का मौका नहीं देना चाहती। गुजरात में संभावनाओं के बीच केवल मोदी को अंतर मान रही कांग्रेस उनके धुंआधार प्रचार की आंधी का जमीनी असर थामे रखना चाहती है। ताकि चुनाव में इस बार उलटफेर की संभावना का दरवाजा खुला रखा जा सके।
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