BRIJENDRA BAHADUR MAURYA ———————————
न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल के फैसले को लागू कराने हेतु अनशन
मनमानी करने वाले निजी स्कूलों को अभिभावक फीस देना बन्द करे : संदीप पाण्डेय

लखनऊ । सोशलिस्ट पार्टी समान शिक्षा प्रणाली लागू करवाने के लिए राजधानी के हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर अनशन कर रही है जिससे कि प्रत्येक बच्चे को एक जैसी गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल सके। मशहूर समाजसेवी संदीप पाण्डेय ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल के 18 अगस्त 2015 के आदेश कि सभी सरकारी तनख्वाह पाने वालों के बच्चे अनिवार्य रूप से सरकारी विद्यालय में पढ़ें को लागू करो जिसके बिना सरकारी विद्यालयों की स्थिति सुधर नहीं सकती और गरीब के बच्चे को अच्छी शिक्षा नहीं मिल पा रही। उन्होनें कहा कि सरकारी नौकरी या उच्च शिक्षण संस्थानों में उन्हीं को स्थान मिले जिन्होंने सरकारी विद्यालयों से शिक्षा ग्रहण की हो, चुनाव में भी वही खड़ा हो सके जो सरकारी विद्यालय से पढ़ा हो। निजी विद्यालयों का राष्ट्रीयकरण करो या कम से कम उनके प्रशासनिक हिस्से का सरकारीकरण हो और उनके कार्यालय में बेसिक शिक्षा अधिकारी या जिला विद्यालय निरीक्षक का अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए बैठे कि सरकारी नियम कानूनों का पालन हो। संदीप पाण्डेय ने कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 का अनुपालन सुनिश्चित कराने हेतु एक शिक्षा आयोग का गठन किया जाए। निजी विद्यालयों द्वारा लिए जाने वाले शुल्क पर अंकुश लगे। उ.प्र. के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के लिए सालाना रु. 6,000 और उच्च माध्यमिक के लिए रु. 10,000 शुल्क सीमा तय की जाए। शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत जो विद्यालय सरकार के नियम कानून मानने को तैयार नहीं, जैसे कि 25 प्रतिशत अलाभित व दुर्बल वर्ग के बच्चों के दाखिले के आदेश का न मानने पर, उनकी मान्यता रद्द की जाए। उन्होनें कहा कि अभिभावक निजी विद्यालयों को शुल्क देना बंद कर दें व सरकार मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत शुल्क की प्रतिपूर्ति करे।

राजेन्द्र यादव ने कहा कि लखनऊ में सिटी मांटेसरी स्कूल, नवयुग रेडियंस, सिटी इण्टरनेशनल, सेण्ट मेरी इण्टर कालेज, विरेन्द्र स्वरुप पब्लिक स्कूल जिलाधिकारी का आदेश व राष्ट्रीय कानून को मानने को तैयार नहीं। इसी तरह कानपुर में वीरेन्द्र स्वरुप, चिंटल पब्लिक व स्टेपिंग स्टोन पब्लिक स्कूल कानून की अवहेलना कर रहे हैं। हम इन विद्यालयों के खिलाफ कार्यवाही की मांग करते हैं और अभिभावकों से आग्रह करते हैं कि इन विद्यालयों को शुल्क देना बंद कर दें।
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