निवेश महाकुंभ में देश की धरोहर आयुर्वेद को भूली योगी सरकार
– घर मे ही नजरअंदाज हुआ आयुर्वेद
– प्रदेश में आयुर्वेद उद्योग बढ़ता समाप्ति की ओर
– नयी दिल्ली आयुष मंत्रालय मे रजिस्टर्ड एसोसिएशन को जिलाधिकारी से नहीं मिला आमंत्रण
– योग और आयुर्वेद को अपनाने के सारे वादे खोखले

कानपुर महानगर। गोमती नदी के तट निवेश की बुनियाद पर प्रदेश की तरक्की का सपना बुनने वाली योगी सरकार ने जहाँ निवेशकों और उधोगपतियों को एक मंच पर ला दिया। वहीं उन्हीं सूबे के मुखिया द्वारा भारत देश की धरोहर और हमारे देश की हज़ारो साल की पद्दति को नज़र अंदाज़ कर दिया गया।
कानपुर महानगर को जहां खोया हुआ सम्मान वापस दिलाने और मेट्रो ट्रेन चलाने की बाते की जा रही हैं वहीं प्रदेश की एक मात्र आयुर्वेद औषधि निर्माता एसोसिएशन जो कि नयी दिल्ली के आयुष मंत्रालय में रजिस्टर है को जिला अधिकारी द्वारा आमंत्रण नहीं दिया गया।
फॉर्मक्यूटिकल एण्ड आयुर्वेदिक ड्रग मेनिफेक्चर्स एसोसिएशन के सचिव अमित श्रीवास्तव और अध्यक्ष नकुल साहनी ने अवधनामा को जानकारी देते हुए बताया कि उक्त कार्यक्रम के बारे मे एसोसिएशन को कोई आमंत्रण ही नहीं मिला है।
जहां भारत सरकार एक ओर आयुर्वेद के विकास की बात करती है वहीं लगभग दो वर्षों में करीब 50 प्रतिशत फॉर्मेसिया बंदी के कगार पर चली गयी हैं। नये नियमों के कारण अब बिना जी0एम0पी0 (GMP) के कोई भी फैक्ट्री कार्य नहीं कर सकती है।
लेकिन कानपुर महानगर ही नहीं बल्कि प्रदेश की सैकडों फार्मेसियों की फाइलें लखनऊ निदेशालय में धूल खा रही हैं। अगर प्रदेश सरकार इसी तरह से नजर अंदाज करती रही तो प्रदेश में आयुर्वेद उद्योग समाप्त हो जायेगा।
सर्वोत्तम तिवारी की रिपोर्ट





