PANCHDEV YADAV
चकबंदी अधिकारियों की मिलीभगत दर्जनों किसान पुश्तैनी भूमि से बेदखल
मलिहाबाद,लखनऊ|चकबंदी लेखपालों की मिली भगत से किसानों की बेशकीमती जमीनों को इधर उधर कर पैसा पैदा करने के लालच से परेशान ग्रामीणों ने चकबंदी अधिकारी को प्रार्थपत्र देकर न्याय की गुहार लगायी। बाद में तहसील दिवस व जिलाधिकारी लखनऊ कार्यालय शिकायत दर्ज कराकर न्याय मांगा परन्तु अब तक किसानों को न्याय नहीं मिल सका।

राजस्व मानचित्र के अनुसार तहसील क्षेत्र की ग्राम सभा बदैयां मलिहाबाद व ग्राम सभा दुधरा तहसील बख्शी का तालाब के बीच गोमती नदी सीमारेखा बनकर बहती है। दोनों गांवों की सीमा विभाजक रेखा गोमती नदी है। चकबंदी अधिकारी बख्शी तालाब के निर्देश पर कुछ दिनों पूर्व नदी पार कर पीएसी व पुलिस फोर्स के साथ जेसीबी लेकर बलपूर्वक किसान रज्जन रावत,गोधन,मूलचन्द,रामकुमार,रा जाराम,दिनेश,राजेन्द्र,रामेश् वर,खेमनाथ सहित दो दर्जन से अधिक किसानों के गाटा सं0 613,651/2,652,666,668/2,674, 675/1,668/1,690/2,693/1,701/1, 707/1,712/5,953 ,812, आदि गाटों को गोमती के उस पार के दुधरा गांव के निवासियों को बलपूर्वक आवंटित कर दी। उक्त अनिमियतता के विरूद्व पीड़ित किसान व ग्राम प्रधान रूबी सिंह ने बीती 17 मई को तहसील दिवस में शिकायत दर्ज करायी। जिसके बाद 26 मई को जिलाधिकारी को भी शिकायत दर्ज करायी।
ग्रामीणों का आरोप है कि बदैयां निवासी पिछले 40 वर्षा से अपने अपने गाटों पर काबिज होते चले आ रहे हैं इसके बावजूद चकबंदी अधिकारियों ने बिना कोई नोटिस जारी किये हुए बदैया ग्रामवासियों की जमीन को दुधरा ग्राम वासियों को चक आवंटित कर दिये गये हैं। ग्राम प्रधान रूबी सिंह के अनुसार उक्त चक आवंटन कृत्य मा0 उच्च न्यायालय द्वारा रणवीर सिंह बनाम संयुक्त संचालक चकबंदी,राजस्व निर्णय संग्रह 2007 इलाहाबाद पेज 242 व 2007 (102) आरडी 42 इलाहाबाद में प्रतिपादित विधि व्यवस्था के खिलाफ है। यहां के पीड़ित किसानों का कहना है कि दोनों गांवों के बीच से सीमारेखा के रूप में बहती गोमती नदी की धारा कभी कभी रूख बदल देती है जिससे सीमांकन गड़बड़ा जाता है जब तक सहीं ढंग से सीमांकन नहीं होगा तब तक हम सब किसानों को न्याय नहीं मिल पायेगा।
क्या कहता है उ0प्र0जमींदारी-विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950
अधिनियम की धारा 3 के अनुसार नदी क्रिया से प्रभावित भूमि की स्पष्ट व्याख्या करते हुए कहा गया है कि जिन क्षेत्रों से होकर नदी बहती है। जहां एक ओर एक गांव होता है और दूसरी ओर दूसरा गांव वहां नदी की मध्य धारा उन दोनों गांवों की सीमा होती है। जब नदी अपनी धारा बदल देती है तो एक गांव की भूमि दूसरे गांव में चली जाती है। यदि किसी का खेत नदी की धारा में चला जाय तब भी जोतदार का कब्जा बरकरार समझा जाता है, और जब कभी धारा बदलने से फिर खाली हो जाता है तो पूर्व जोतदार को ही वह भूमि प्राप्त हो जाती है,बशर्ते भूमि का ठीक से निर्धारण हो सके। जब भूमि नदी की धारा में चली जाय और नजदीक भविष्य में उसके निकलने के अवसर न दिखाई दें,और जो 16 वर्षो के पश्चात् पुनः प्रकट हो जाये तो यह नही समझा जायेगा कि पूर्व स्वामी का अधिकार इस भूमि पर फिर से हो सकेगा। ऐसी दशा में पूर्व स्वामी का अधिकार स्वतः समाप्त हो जाता है।

लगता है कि उपरोक्त धारा की पेशीदगी का फायदा उठाकर चकबंदी विभाग के लोगों ने दुधरा गांव के किसानों से भरपूर धन लेकर बदैयां गांव के किसानों के साथ खेल कर दिया है। अब देखना यह है कि बदैयां गांव के पीड़ित किसानों को न्याय मिल पाता है या नहीं
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