खेत मजदूर यूनियन राज्य कौंसिल बैठक सम्पन्न गरीब जनता की समस्याओं पर होंगे जिला केन्द्रों पर धरना प्रदर्शन उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन की राज्य कौंसिल बैठक में तय किया गया है कि गरीब जनता की रोजी रोजगार आवास, 3000 रूपया मासिक वृद्धावस्था पैंशन, सस्ता राशन, बनाधिकार के तहत भूमि आवंटन व सभी खेत मजदूरों के लिए कम से कम दो एकड़ का भूमि पट्टा, दलितों पर बढते अपराध रोकने, मनरेगा में रोजगार व मजदूरी का भुगतान गरीबों के लिए स्वास्थ्य व शिक्षा तथा की गारंटी आदि मांगों पर मार्च में गांव-गांव अभियान चलाकर जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन किये जायेंगे और जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपे जायेंगे। बैठक में रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए महासचिव बी एल भारतीय ने कहा कि जिस प्रकार प्रधानमंत्री का दो करोड़ प्रतिवर्ष रोजगार देने का वायदा जुमला साबित हुआ है ठीक उसी प्रकार 2019 के लोक सभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए लखनऊ में योगी सरकार द्वारा देशी व विदेशी पूंजीपतियों का किया गया जमावड़ा प्रदेश की जनता के लिए लालीपाप है।

सरकार का बजट किसान हितैषी के नाम पर धोखा सिद्ध होगा क्योंकि फसल बीमा योजना का लाभ गत वर्ष की भांति किसानों के बजाय कम्पनियों को ही मिलेगा। सरकार ने मनरेगा के आवंटन में कोई बढोतरी नहीं की है। मनरेगा में रोजगार का औसत काफी नीचे है। रोजगार की तलाश में लोग गांव से शहर की ओर पलायन कर रहे हैं। खेती में संकट के चलते ग्रामीण गरीबों का हाल लगातार बुरा होता जा रहा है। न रोजगार की गारंटी है और न भोजन की। ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य व शिक्षा तथा विकास तो पिछड़ता ही जा रहा है। योगी सरकार के बजट में सबसे अधिक आवंटन हाइटेक सिटी व सड़कों के लिए है जिसका सर्वाधिक फायदा ठेकेदारों व कम्पनियों को होगा। ग्रामीण क्षेत्र व ग्रामीण गरीब तो उपेक्षा का शिकार है। प्रदेश में करोड़ों लोग बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं। प्रदेश में खराब कानून व्यवस्था में कोई सुधार नहीं है। दलितों के खिलाफ अपराध रोकने में सरकार फेल है। लगता है कि आये दिन सुनियोजित षडयंत्र के तहत दलितों पर हमले हो रहे हैं। इलाहाबाद में पैर छू जाने के बाद दलित छात्र की हत्या, उन्नाव में दलित युवती की आग से जला कर हत्या, कन्नौज मेडिकल कालेज में दलित युवती से रेप, बलिया में दलित की हत्या, सीतापुर में फाइनेन्स कम्पनी के गुण्डों द्वारा ट्रैक्टर से कुचल कर दलित किसान ही हत्या ताजा उदाहरण हैं। दलितों के खिलाफ आपराधिक घटनायें किसी न किसी क्षेत्र में रोज हो रहीं हैं। दलितों के विकास के लिए गत वर्ष के बजट में आवंटित धनराशि 4732 करोड़ रूपया विभिन्न विभागों में पड़ा हुआ है जिसमें से अंश मात्र भी खर्च नहीं किया गया है। राम मंदिर, गौरक्षा, वीफ, लवजेहाद के नाम पर मुसलमानों के खिलाफ साम्प्रदायिक भावनाएं भड़काने का काम किया जा रहा है। मुस्लिम समुदाय अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने संगठन का विस्तार करने और संघर्ष तेज करने का आव्हान किया। बैठक की अध्यक्षता राज्य अध्यक्ष बृहमस्वरूप ने की। बैठक को सतीश कुमार, जियालाल, राजीव शांत, वीरेन्द्र प्रताप मिश्र, शिवकुमार ने भी सम्बोधित किया। बैठक में 17 जिलों से यूनियन पदाधिकारी व कौंसिल सदस्य उपस्थित रहे। प्रस्ताव पास कर 30 अप्रैल तक सदस्यता भर्ती लक्ष्य पूरा करने, जिलों व राज्य केन्द्र में दलित अधिकार सम्मेलन आयोजित करने, जिला बस्ती में राज्य स्तरीय शिक्षण शिविर चलाने का निर्णय लिया गया।





