
दरअसल ड्राइवर संपत राम की ड्यूटी का ये आखिरी दिन था। उसने घंटों गाड़ी में बैठाकर जिलाधिकारी को घुमाया था। आज सम्मान के नाते उसका दिन था। लिहाजा जिलाधिकारी ने भी अपने ड्राइवर की भावना का ख्याल रखा और ड्यूटी के आखिरी दिन खुद गाड़ी चलाकर संपतराम को घर छोड़ा। इससे पहले समारोहपूर्वक ड्राइवर और एक अन्य कर्मचारी को विदाई दी गई। इसके अलावा भविष्य निधि और अन्य राशि की चेक कर्मचारियों को सौंपा गया।
ड्राइवर संपत राम से जब ये अनुभव पूछा गया तो उनकी आंखें छलक आईं। संपत राम ने कहा कि 34 वर्ष 7 माह 13 दिन तक उन्होंने बतौर ड्राइवर सेवा की। उन्हें इस बात का गुमां तक नहीं था कि आखिरी दिन उन्हें इस तरह का सत्कार और सम्मान मिलेगा।
संपतराम जब घर पहुंचे तो डीएम साहब को ड्राइविंग सीट पर बैठे देख पत्नी और परिवार के अन्य लोग भी हैरान रह गए। यही नहीं पूरा मुहल्ला इस वाकये को देखने के लिए जुट गया। किसी अधिकारी की इस तरह की दरियादिली कम ही देखने को मिलती है।
जिलाधिकारी उदय कुमार सिंह ने कहा कि जिस कर्मचारी ने जीवन भर हमारी सेवा की है। वे इस सम्मान के हकदार हैं। सेवा भाव से ही प्रेरित होकर डीएम ने ड्राइवर की गाड़ी खुद चलाने का फैसला किया।
जिलाधिकारी और डीएम ऑफिस अपने दोनों कर्मियों की विदाई को लेकर काफी पहले से ही तैयारी कर रहे थे। जिसके बारे में रिटायर होने वाले दोनों कर्मचारियों को जानकारी नहीं दी गई थी। शाम के वक्त जब दोनों घर जाने लगे तो उन्हें कार्यक्रम के बारे में बताया गया।
ड्राइवर संपत राम शायद उन क्षणों को जीवनभर नहीं भूल पाएंगे। जब खुद जिलाधिकारी ने सरकारी गाड़ी में पीछे बैठाकर घर छोड़ा।
https://www.youtube.com/watch?v=eBIyfSqbc0o





