हिम्मत के दम पर पाया मकाम पाक कला बनी सफलता की सीढ़ी
माँ की सीख ने निभाया साथ
कानपुर महानगर। शहर की जानी मानी शक्सियत शैफ कविता सिंह ने अपनी मेहनत और लगन से अपना एक अलग ही स्थान बनाया है़ ..

कविता के पति के देहांत के बाद दो बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी के साथ ही दो वक्त के निवाले की व्यवस्था भी एक अहम मुद्दा था और उस पर मायके और ससुराल से भी किसी तरह की कोई मदद नहीं मिल पा रही थी इन हालातों में कविता के पास अगर कुछ थी तो वो थी उनकी हिम्मत और माँ की सिखाई पाक कला जिसके दम पर कविता ने अपने हौसलों को बरकरार रखते हुये आगे बढ़ना शुरू किया और जैसा की जगविदित है़ हिम्मत करने वाले की मदद भगवान भी करते है़ और कविता के साथ भी यही हुवा उन्होंने मास्टर शैफ के साथ ही अनगिनत प्रतियोगिताओं में ना सिर्फ भाग लिया बल्कि विजई भी हुई..इन सबके साथ ही कविता ने दूसरी अन्य महिलाओं को भी पाक कला में पारंगत करना शुरू किया जिससे उनको भी समाज में उच्च स्थान प्राप्त हो सके…कविता के मित्र और सहयोगी मनीष राज जो की स्वयं एक शैफ है़ की मदद ने भी कविता के हौसलों को कभी कम नहीं होने दिया…मनीष के अनुसार कविता ना सिर्फ एक अच्छी माँ है़ बल्कि एक अच्छी इंसान और बेहतर शैफ भी है़ …कविता भविष्यए भी अपने हुनर के जरिये महिलाओं की मदद करते रहना चाहती है़|
सर्वोत्तम तिवारी की रिपोर्ट
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