मथुरा। जय गुरुदेव आश्रम में चल रहे छठवीं वार्षिक भंडारा सत्संग मेला के 21मई को अंतिम दिन राष्ट्रीय उपदेशक बाबूराम ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जगत में श्रोताओं के स्वभाव चार प्रकार के होते हैं। सिंह,श्वान,चलनी और सूप। ऐसे लोगों में अहंकार बहुत होता है। यह पानी में पड़े पत्थर के समान होते हैं। श्वान स्वभाव वाले जीव सत्संग में बैठकर झपकी लेते हैं। सत्संग की बातों को सुनने में मन नहीं लगता लेकिन जब सांसारिक चर्चा होती है। तो उस समय झपकी नहीं आती। इसका कारण पूर्व जन्म के संस्कार हैं। चलनी स्वभाव वाले श्रोता सत्संग में आते हैं लेकिन वे केवल गलती को ढूंढते हैं। सत्संंग के साथ सार तत्व को छोड़ देते हैं। सिंह श्वान और चलनी स्वभाव वाले श्रोता परमार्थ से खाली रहते हैं। और सूप स्वभाव वाले श्रोता साधु प्रवृत्ति के होते हैं। सत्संग में सार्थक को ग्रहण करते हैं संत मंत्र के साधक को हमेशा आशावादी होना चाहिए। इससे साधना में तरक्की होती हैै।

राष्ट्रीय उपदेशक सतीश चंद्र महापुरुषों की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए कहा- महातम सुन मेरे भाई सब संतन ने किया बखान। संत फकीरों ने भक्ति मार्ग जारी किया इसके लिए घर परिवार छोड़ने की जरूरत नहीं कलयुग में संतों महात्माओं ने ग्रस्त आश्रम में रहकर भक्ति करने का आदेश दिया तन्मय जीवात्मा दोनों आंखों के मध्य भाग में रहती है। मनुष्य शरीर में 10 दरवाजे होते हैं। नौ दरवाजे शरीर की नौ इंद्रियां हैं, और दसवॉ दरवाजा दोनों आंखों के ऊपर मध्य भाग में जहां मनुष्य टीका लगाता है। महात्मा हमारे फैले हुए ख्याल को शरीर के नौ द्वारों से खींचकर दसवें द्वार पर लाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि शरीर में जीवात्मा को प्रकाश चक्रों से होता हुआ नीचे तक फैला हुआ है, नीचे से सबसे पहला चक्र गुदा चक्र है। यहां पर गणेश की छाया पड़ रही है लाल रंग का चीर दल का कमल है। यहॉ पृथ्वी तत्व पाया जाता है। इन्द्रियॉ चक्र पर जल तत्व पाया जाता है। यहॉ छ: दल कमल हैं। यहां ब्रह्मा और सावित्री की छाया पड़ रही है। नाभि चक्र पर लाल रंग का आठ दल कमल है। यहॉ विष्णु और लक्ष्मी की छाया पड़ रही है। अग्नि तत्व पाया जाता है। ऊपर में हृदय चक्र और कंठ चक्र है। जहां पर क्रमशः वायु और आकाश तत्व पाए जाते हैं। कंठ चक्र में 16 दल कमल इसके ऊपर दसवां द्वार है। जहां से सूरत जीव आत्मा का वास है। संत फकीर नीचे के नौ द्वारों को छोड़कर दसवें द्वार से ऊपर साधना करते हैं। शरीर का प्रलय यानि मौत एक छोटी सी कयामत की तरह है। और सृष्टि का प्रलय एक बड़ी कयामत है। दोनों में पांचों तत्वों का नष्ट प्रलय होता है।
संस्था अध्यक्ष पंकज जी महाराज ने बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के छठ के पांच दिवसीय वार्षिक भंडारा सत्संग महिला के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर अधिकारियों कर्मचारियों और बुद्धिजीवियोंऔर ब्रज के शहरी और ग्रामीण जनता के साथ पूरे जिले की जनता का आभार प्रकट किया। उन्होंने आगामी गुरु पूर्णिमा पर्व 25 से 29 जुलाई 2018 तक जयगुरुदेव आश्रम मथुरा में मनाए जाने की घोषणा की।
जिला प्रभारी शाहिद कुरेशी की रिपोर्ट
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