Saturday, March 14, 2026
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पीड़ितों द्वारा दी जाने वाली तहरीर को बदलवाकर खुद बोल बोल कर लिखवाती है पुलिस

पुलिस की हीलाहवाली से अपराध चरम पर
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थाने से टरकाने वाली करतूत से नहीं बाज आ रही खाकी
 पीड़ितों द्वारा दी जाने वाली तहरीर को बदलवाकर खुद बोल बोल कर लिखवाती है पुलिस
 मनमानी तहरीर लिखवाने के बाद भी नहीं दी जाती पीड़ित को कोई प्रतिलिपि
 थानों में लगे बड़े बड़े बोर्डों पर लिखे नियम पुलिस की मनमानी के आगे हवाहवाई
 शिकायत के बाद पुलिस द्वारा ठोस कदम न उठाने से अपराधियों के हौसले बुलन्द
सर्वोत्तम तिवारी, कानपुर
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आज आम जनमानस के साथ हो रहे अपराधों पर लगाम न लग पाने का बहुत बड़ा कारण पुलिस की लचर कार्यप्रणाली और उसकी हीलाहवाली है अपराधियों के हौसले बुलन्द करने में पुलिस की बहुत बड़ी भूमिका है।
 घटना के बाद थानों में पीड़ित द्वारा दी जाने वाली तहरीर को लेने में पुलिस पीड़ित को टरकाने में लग जाती है। अगर बहुत दबाव पड़ा या मान मनौउव्वल की गई तो अपराध कितना भी जघन्य हो थानों में मौजूद पुलिसकर्मी पीड़ित को खुद बोल बोल कर अपने अनुसार तहरीर लिखवाते हैं। और घटनाक्रम को इतना हल्का दिखा देते हैं जिससे उनकी सरदर्दी बिल्कुल कम हो जाये। पुलिस द्वारा खुद बोल बोल कर लिखाई गई तहरीर की भी कोई रिसीविंग थाने से पीड़ित को कभी नहीं दी जाती है। और पीड़ित को देखते हैं, कहकर चलता कर दिया जाता है। जबकि थानों में लगे बड़े बड़े बोर्डों पर लिखा है कि आपकी तहरीर निशुल्क ली जायेगी, तहरीर की एक प्रति (रिसीविंग) तुरन्त दी जायेगी, कार्यवाही का समय और सुनवाई सहित मानवाधिकार के कई नियम जो पुलिस और आम आदमी के बीच होते हैं सब लिखे हुए हैं। लेकिन थानों की दीवारों पर लगे ये नियम कायदे वाले बोर्ड सम्बंधित थाने की पुलिस द्वारा की जाने वाली इस निकम्मी करतूत पर मुँह चिढ़ाते हैं।
महानगर के चौबेपुर थाना क्षेत्र में हुई एक घटना पर पुलिस ने जो खेल किया उससे साफ जाहिर होता है कि बढ़ते अपराधों का आधा सच पुलिस की हीलाहवाली है, जिससे आज अपराध चरम पर है।
चौबेपुर कस्बा निवासी पीड़ित रामजी तिवारी ने बताया कि विगत 14 मार्च को जमीनी रंजिश में उनकी 85 वर्ष की माताजी पर घर में घुसकर कुछ लोगों द्वारा कट्टे की बट और धारदार हथियार से जानलेवा हमला किया गया था। पीड़ित के अनुसार मरणासन्न स्थिति में लहूलुहान बूढी माँ को लेकर थाने पहुँचे और घटनाक्रम बताते हुए तहरीर दी लेकिन मौजूद सिपाही ने तहरीर को लेने से इनकार किया और कहा तहरीर दुबारा लिखो। दुबारा लिखने के बाद भी सिपाही द्वारा तहरीर नहीं ली गई और नया कागज थमाकर सिपाही ने खुद बोल बोलकर तहरीर लिखवाई और सारा घटनाक्रम बदल दिया। मनमानी तहरीर की बिना रिसीविंग के  मेडिकल के लिये एक महिला सिपाही भेज दी गई।
 पीड़ित के अनुसार माँ की हालत नाजुक देख प्राथमिक स्वास्थ्यकेन्द्र चौबेपुर से डॉक्टरों ने उर्सला रिफर कर दिया। गम्भीर हालत में उर्सला इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। उक्त घटना सभी प्रमुख समाचारपत्रों पर प्रकाशित भी हुई।
 लेकिन आज इतने दिन बीत जाने के बाद भी थाना चौबेपुर पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ कोई भी कार्यवाही नहीं की। जबकि अपराधी उनको बार बार फोन पर धमकी दे रहे हैं। जिसकी भी शिकायत थाने में की जा चुकी है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पुलिस की ऐसी लचर कार्यप्रणाली से लगता है कि अपराध चरम पर पहुँचाने में पुलिस की बहुत बड़ी भूमिका है।
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