कचेहरी परिसर में आवारा जानवरो व बंदरो का कहर
कानपुर महानगर। आवाजरा जानवरों का जमावडा कानपुर नगर की सडको और गलियों में ही नही है अपितु कानपुर कचेहरी परिसर में भी आपको आवारा जानवरो में गाय, कुत्ता, बंदर आदि आसानी से दिख जायेगे, जिसमें बंदरों की पूरी फौज ही है जिससे कचहेरी परिसर में आने वाले हमेशा भय में रहते है। वहीं कई बार यह बंदर हिसंक हो उठते है और लोगो पर हमला भी कर देते है। अधिवक्ताओं ने बताया कि कचहरी में रोजाना हजारो लोग आते है और यहां खान-पानी की चीजें भी बिकती है जिससे पूरे परिसर व आसपास बंदरो का जमावडा लगा रहा है।

बंदरों के आतंक से कानपुर कोर्ट परिसर भी अछूता नही है और यह समस्या कोई आज की नही है। कई वर्षो से यहां बंदरो के दल मौजूद है जो आपस में गुट बनाकर रहते है, लडते है, उधम मचाते है और यहां आने वाले लोगों को डराते है। बताया जाता है कि कई बार बंदर हमलावर भी हो जाते है तथा लोगों को उनके गुस्से का शिकार होना पडता है। वकीलो की माने तो यहां हमेशा बंदरो के कारण भय बना रहता है, कम बौन सी घ्ज्ञटना हो जाये पता नही लेकिन इस परेशानी को कोई हल अभी तक नही निकाला गया है। न तो नगर निगम के अधिकारीगण और न ही जिला प्रशासन के अधिकारी इस ओर ध्यान दे रहे है। वकीलो ने कहा कि अधिकारी तो यहां कारों पर आते है लेकिन वह लोग दिन भर कचहरी में ही घूमते है और आये दिन उनका बंदरों से सामना होता है। बंदरो ने यहां लोगो का जीना दूभर कर दिया है।
नगर निगम व जिला प्रशासन नही उठाते कदम
इस सम्बन्ध में बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष एडवोकेट अनिल त्रिपाठी का कहना है कि समस्या बडी गंभीर है और आम जन-मानस से जुडी है लेेकिन नगर निगम व जिला प्रशासन के अधिकारी इससंदर्भ में कोई सकारात्मक कदम नही उठाते है। कहा निगर निगम और जिला प्रशासन के अधिकारियों की सुविधा भोगी प्रवृत्ति कब किसके लिए खतरनाक साबित हो जाये यह कहा नही जा सकता। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता एक0के0 वर्मा का इस संदर्भ में कहना है कि अधिवक्ताओं ने कई बार कचेहरी परिसर में घूम रहे आवारा जानवरो तथा बदंरों को पकडने के लिखा पत्र लिखा है लेकिन आज तक इस आरे कोई भी अधिकारी ध्यान नही दे रहा है।
सर्वोत्तम तिवारी की रिपोर्ट





