Thursday, February 26, 2026
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राष्ट्रभाषा हिन्दी के पक्ष में आन्दोलन

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आजमगढ़। राष्ट्रभाषा हिन्दी के पक्ष में आन्दोलन के महानायक और भाषा एवं साहित्य उन्नयन संघर्ष में अपना सम्पूर्ण जीवन लगा देने वाले आचार्य चन्द्रबली पाण्डेय की पुण्य तिथि आचार्य चन्द्रबली पाण्डेय स्मृति समिति के तत्वावधान में गत 24 जनवरी, बुधवार को देर सायंकाल संस्था के राहुल नगर स्थित कार्यालय पर श्रद्धापूर्वक मनायी गयी। इस अवसर पर एक संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष पं. अमरनाथ तिवारी तथा संचालन प्रभुनारायण पाण्डेय‘प्रेमी’ ने किया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने आचार्य जी के संत जीवन और उनके त्याग की चर्चा करते हुए उन्हें हिन्दी का दधीचि कहा। राष्ट्रभाषा के संग्राम में 1932 से लेकर 1949 तक हिन्दी-अंग्रेजी और उर्दू में लगभग दो दर्जन पैम्पलेटों और दर्जनों गौरव ग्रंथों चर्चा की।
वरिष्ठ पत्रकार डा. श्रीनाथ सहाय ने अपने सम्बोधन में ने आचार्य जी के सम्पूर्ण वांडगमय की चर्चा करते हुए कहा कि ‘तसव्वुफ अथवा सूफीमत’ उनकी प्रसिद्ध रचना है। उनके गौरव ग्रंथों में ‘तुलसीदास’, ‘कालीदास’, ‘शुद्रक’ और ‘केशवदास’ अग्रगण्य है। उन्होनें कहा कि आचार्य जी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होनें हिन्दी के क्षेत्र ऐसे कार्य किए जो उनसे पहले किसी के द्वारा नहीं किया गया था।
श्री विजयधारी पाण्डेय ने कहा कि हिन्दी को भारत की राष्ट्रभाषा का दर्जा प्रदान कराने में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले आचार्य चन्द्रबली पाण्डेय को हिन्दी भाषा-भाषी सदैव याद करते रहेंगे।
अध्यक्षता करते हुए पं. अमरनाथ तिवारी ने आचार्य जी के अंग्रेजी-हिन्दी पैम्फलेटों की चर्चा करते हुए कहा कि उनके एक-एक अंक पर शोध प्रबन्ध लिखा जा सकता है। वे राष्ट्रभाषा हिन्दी के अमर सेनानी, सूफी दर्शन के महान व्याख्याता और हिन्दी आदि काल के महान ऋषि थे, जिन्होनें ब्रह्मचर्य जीवन बिताते हुए सम्पूर्ण जीवन हिन्दी को समर्पित कर दिया।
निशीथ रंजन तिवारी ने सम्पूर्ण भारत में हिन्दी राष्ट्रभाषा के लिए जीवन पर्यन्त संघर्ष करने वाले आचार्य चन्द्रबली पाण्डेय की एक प्रतिमा जनपद मुख्यालय पर लगने का मांग उठाई जिसे उपस्थित लोगों ने अपना समर्थन दिया।
इस अवसर पर जनपद के वरिष्ठ साहित्यकार, भोजपुरी के प्रयोगधर्मी कवि राम प्रकाश शुक्ल ‘निर्मोही’ जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया गया एवं परमपिता परमेष्वर से गतात्मा की शान्ति व परिजनों को दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने के लिए दो मिनट का मौन रख प्रार्थना किया गया।
इस अवसर पर सर्वश्री सुनील कुमार राय, अवधराज यादव, राजीव रंजन तिवारी, रत्नाकर दुबे आदि प्रमुख लोगों ने गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए आचार्य जी के प्रति अपना श्रद्धा सुमन अर्पित किया।
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