भारतीय संस्कृति की पहचान में ही है उत्थान: डॉ0 बिंदु
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एवं ऑल इण्डिया वूमेन डेवलपमेंट एण्ड ट्रेनिंग सोसाइटी के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हुई कार्यशाला
भारतीय संस्कृति को बचाने बढ़ाने व प्रबल बनाने को लेकर हुई विस्तृत चर्चा
कानपुर महानगर। जीवन के किसी भी क्षेत्र में कार्य करना हो तो हौसले की जरुरत होती है। पर यह हौसला हर किसी के पास नहीं होता। परन्तु कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इन सबसे इतर कुछ कर गुजरने का जज्बा इस कदर मन में लिये होते हैं कि उनके सामने आने वाली हर मुश्किल मात्र एक तिल के समान ही होती है। यकीनन जब भी इस तरह के व्यक्तित्व समाज में सामने आते हैं तो उनकी अपनी एक अलग पहचान बन जाती है। जो किसी को भी प्रभावित करने के लिये काफी होती है। ऐसी ही पहचान लेकर आई है “शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास” नामक संस्था!

ये शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नामक संस्था जिसका उद्देश्य है भारतीय संस्कृति और शिक्षा को आगे बढ़ाना। ’’माॅ-मातृभूमि-मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं’’ को अपना मूल मंत्र मानने वाली यह संस्था आज अपने संकल्प पर पूरी तरह से खरी उतर रही है। जिसमें अपने ही कंपू शहर की सर्वगुण सम्पन्न डाॅ0 बनदेव कुमारी सिंह(बिंदु जी) का भी महत्वपूर्ण स्थान है।
संस्था द्वारा समय समय पर वर्कशॉप (कार्यशालायें) लगाकर भारतीय संस्कृति को बचाने बढ़ाने और प्रबल बनाने के लिये सभी को दृढ़ संकल्पित किया जाता है।
इसी कड़ी में कानपुर शहर के चित्रा इन्टर कालेज हमीरपुर रोड नौबस्ता में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एवं ऑल इण्डिया वूमेन डेवलपमेंट एण्ड ट्रेनिंग सोसाइटी के संयुक्त तत्वाधान में शिक्षक, शिक्षा व व्यक्तित्व विकास एवं चरित्र निर्माण की संयुक्त एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम की शुरुआत ऑल इण्डिया वूमेन डेवलपमेंट एण्ड ट्रेनिंग सोसाइटी की अध्यक्ष/डायरेक्टर व शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के व्यक्तित्व विकास व चरित्र निर्माण की कानपुर प्रान्त की संयोजिका डाॅ0 बनदेव कुमारी सिंह (बिन्दु जी) के द्वारा की गई। इस कार्यशाला के विशेष मौके पर असिस्टेंट प्रोफेसर सरस्वती महिला महा विद्यालय बीएड विभाग व न्यास के शिक्षक शिक्षा के प्रांतीय संयोजक डॉ0 प्रबल प्रताप सिंह भी मौजूद रहे। कार्यशाला में जहाँ डॉ0 प्रबल प्रताप सिंह ने शिक्षक और शिक्षा में कैसे विस्तार किया जाये पर चर्चा की वहीं साथ ही अपने वक्तव्य में एक अच्छे शिक्षक के अंदर कैसे संस्कार उनके कौशल और शिक्षक के अंदर किस प्रकार के गुणों का समावेश हो यह भी बताया।
वहीं प्रान्त संयोजिका डाॅ0 बिन्दु सिंह ने भी अपने संपूर्ण जीवन के अनुभवों को साझा करते हुये मनुष्य को प्राप्त ईश्वरीय वरदान पंच तत्वों की संपूर्ण व्याख्या करते हुये भारतीय संस्कृति और विकास के बारे मे भी अपने विचारों से सभी को सोंचने पर मजबूर कर दिया कि आज हम अपने जीवन शैली के चलते किस कदर अपने ना सिर्फ तौर तरीकों को प्रभावित कर रहे हैं बल्कि अपनी सभ्यता से भी दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा जहाॅ विदेशी हमारे देश में आकर यहाँ की संस्कृति को अपना रहे हैं वहीँ हमारा युवा वर्ग उससे कोशों दूर होता जा रहा है। डॉ0 बनदेव कुमारी सिंह ने कहा कि आज भारतीय संस्कृति के उत्थान में ही पहचान है।
वरिष्ठ समाज सेविका डाॅ0 बिन्दु ने सबसे यह भी अपील की कि लोग अपने ना सिर्फ शरीर के तत्वों को समझें बल्कि उनमें छिपी ताकत को भी पहचानें। जिससे हमारे शरीर को ही नही वरन् समाज को भी काफी तरक्की प्रदान की जा सकती है। इन सबके अलावा डाॅ0 बिन्दु सिंह व डॉ0 प्रबल पताप सिंह ने छात्राओं के व्यक्तित्व के मूल्यांकन करने हेतु मौखिक परीक्षा भी ली। इस कार्यशाला में एन0टी0टी0 की प्रशिक्षणार्थियों के साथ अध्यापिकाओं ने भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। आयोजित कार्यशाला को पूर्णतयाः सफल बनाने के लिये सभी छात्राओं के साथ ही अध्यापिकाओं ने भी अपना भरपूर सहयोग प्रदान किया।
कार्यशाला में प्रमुख रूप से स्नेह अग्निहोत्री, आभा निगम, रचना शुक्ला, सुनीता वर्मा, दीप्ती तिवारी, मीनू चौरसिया, विमला शर्मा, वीना मिश्रा, लक्ष्मी श्रीवास्तव, रेनू सचान, युवराज चौहान सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।

सर्वोत्तम तिवारी की रिपोर्ट
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