Wednesday, February 25, 2026
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HomeMuslim Worldप्रो.मुजाविर का नाम गिनीज बुक में शामिल हो:प्रो.शारिब

प्रो.मुजाविर का नाम गिनीज बुक में शामिल हो:प्रो.शारिब

प्रो.फजले इमाम व प्रो.मुजाविर उर्दू की रोशन मीनार  उर्दू राइट्र्स फोरम ने किया सेमिनार
सैयद निजाम अली
लखनऊ। प्रो.सैयद फजले इमाम और प्रो. सैयद मुजाविर हुसैन से इल्म सीखने की जरुरत है, दोनों उर्दू अदब की रोशन मीनार हैं। यह बात मशहूर समालोचक प्रो.शारिब रुदौलवी ने आज शाम यहां कैफी आजमी अकादमी में उर्दू राइट्र्स फोरम के तत्वावधान में इन दोनों उस्तादों पर आयोजित एक सेमिनार में व्यक्त किये।
प्रो.शारिब रुदौलवी ने कहा कि सदियों तक इनके शाॢगदों का सिलसिला जारी रहेगा। कहा कि प्रो,मुजाविर हुसैन ने १०७६ नाविल लिखे कि उनका नाम गिनीज बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज होना चाहिए। उन्होंने तारीखी रुमानी व जासूसी नाविल लिखे कि इसी पर शोध लिखे। उन्होंने उर्दू शायरी के जरिये कौमी यकजीदी पर काम किया। कहा कि प्रो.सैयद फजले इमाम छह जबानों पर कंमाड रखते हैं। उस्ताद अपने इल्म को बांटना चाहता है। इन दोनों की किताबे, लेख पढऩे पर पता चलता है कि इल्म व जबान क्या है। प्रो.शारिब रुदौलवी ने अफसोस जाहिर करते
हुए कहा कि आज के छात्र इल्म के लिए नहीं बल्कि क्रेडिट के लिए लिखते हैं।
ख्वाजा उर्दू अरबी फारसी यूनिवॢसटी केे उर्दू के विभागाध्यक्ष ने कहा कि प्रो.मुजाविर के दिल में सदियों की तारीख धड़कती हैै। बचपन में इनका परिवार पाकिस्तान चला गया और अकेले व तन्हाई में अपने फन को निखारा। मुजाहिर साहब का सबसे गहरा तालुक्क प्रो.मलिकजाजा मंजूर अहमद से था। इन्होंने इब्ने सफी के नाम से जासूसी नाविले लिखी। इन्होंने चौधरी महादेव प्रसाद कालेज में उर्दू विभाग कायम किया था। यह मीर तकी मीर, मीर अनीस, अल्लामा इकबाल व जोश मलिहाबादी से काफी  प्रभावित रहे।
इलाहाबाद यूनिवॢसटी के उर्दू े विभागाध्यक्ष प्रो.अली अहमद फात्मी ने प्रो.फजले इमाम पर पेपर पढ़ते हुए कहा कि प्रो.फजले इमाम से पहली मुलाकात कब और कहा हुई यह याद नहीं लेकिन इनके साथ इलाहाबाद यूनिवॢसटी में रहकर बहुत कुछ सीखा यह उर्दू,अरबी फारसी, हिंदी, संस्कृत व भोजपुरी की जबानों के उस्ताद है इसके अलावा राजस्थानी व भोजपुरी  पर भी इन्होंने काम किया। प्रो.फजले इमाम ने  जयपुर में भी उर्दू के लिए बहुत काम किया
और वहां अंजुमन उर्दू तरक्की पंंसद कायम की। यह गैर को भी अपना बना लेते  हिंदी के शब्द इतने गाढ़े बोलतेे थे कि हिंदी के विभागाध्यक्ष को भी समझ में नहीं आता था। कहा कि १९९२ में बाबरी मस्जिद की शहादत के बाद इलाहाबाद यूनिवॢसटी के हिंदू शिक्षकों ने उनको इलाहाबाद यूनिवॢसटी टीचर्र्स एसोसियेशन का अध्यक्ष चुन लिया। इसके बाद प्रो.इमाम ने प्रो.एहतिशाम हुसैन पर एक बड़ा ,सेमिनार इलाहाबाद में कराया। इनकी बड़े सियासत दानो ंसेे भी अच्छे संबध थे। प्रो.इमाम नमाज, रोजा, मोहर्रम सब कुछ करते लेकिन वह दूसरे मजहबों का भी बहुत आदर करते है। एक अच्छा मजहबी इंसान प्रगतिशील होता है
प्रो.फजले इमाम ने कहा कि आज लोग पढऩे में दिलचस्पी नहीं रखते। टीवी व सीरियल देखते हैं। उर्दू के अखबार घरों में नहीं पढ़े जाते। अदब वह है जिसमें जिदंगी की सच्चाई हो, इस दौर में इल्म व अदब का वकार घट रहा हैर्। प्रो.मुजाविर हुसैन ने कहा कि घबराने की जरुरत नहीं है। उर्दू का भविष्य काफी सुरक्षित है। कहा कि मोहर्रम की मजलिसों से हमें उठने बैठने का सलीका आता है। कहा कि कोई भी काम करें वह लगन से और लगातार करें
कार्यक्रम की निजामत करते हुए
प्रो. डा.अब्बास रजा नैय्यर जलालपुरी ने कहा कि इन दोनों ने रेगिस्तानों व पहाड़ों तक में शाॢगद
पैदा किये। इन दोनों के बहुत शाॢगद है। शुरूआत में इंजीनियर दुरूल हसन ने कहा कि लेखन में मुल्म,अवाम व इंसानियत को प्रमुखता दी जानी चाहिए।  आखिर में उर्दू राइट्र्स फोरम के संयोजक सैयद वकार रिजवी ने कहा कि  प्रो.फजले इमाम, प्रो. सैयद मुजाविर हुसैन और प्रो.शारिब रूदलौवी पर यूनिवसिर्टीज में काम होना चाहिए और इन पर सेमिनार हो ताकि छात्र-छात्राओं को इनके बारे में भी पता चले। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुद्धजीवि, पूर्व पुलिस महानिदेशक रिजवान अहमद सहित लखनऊ, ख्वाजा मुईनउद्दीन चिश्ती उर्द अरबी फारसी यूनिवर्सिटीज के शिक्षक व छात्र-छात्राएं मौजूद थी।
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