लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। उपचुनाव में करारी हार इसलिए कि यह दोनों सीटें भाजपा के प्रदेश नेतृत्व के लिए अहम स्थान रखती थीं। गोरखपुर सीट से प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वर्ष 1998 से लगातार चुनाव जीतते रहे वहीं फूलपुर लोकसभा सीट पर पहली बार प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भगवा झंडा फहराया था। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की सीट होने के चलते दोनों सीटें भाजपा प्रदेश नेतृत्व के लिए अहम थीं। लेकिन प्रदेश में बबुआ को बुआ का साथ मिलने के साथ ही दोनों सीटों पर भाजपा के जीतने को लेकर संशय उत्पन्न हो गया था, जो बुधवार को आए चुनाव परिणामों के साथ खत्म हुआ।

अप्रत्याशित रूप से एक-दूसरे के धुर विरोधी रही समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठजोड़ ने भाजपा को उपचुनाव में बुरी तरह से धराशायी कर दिया। सपा-बसपा का गठजोड़ बीते विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन पर भारी साबित हुआ। इसी के साथ आगामी लोकसभा चुनाव के लिए भी नया दलित-मुस्लिम-पिछड़ा और यादव गठबंधन के रूप में उभरा। दो पूर्व मुख्यमंत्रियों का गठजोड़ मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या पर भारी पड़ा। दोनों ही अपना क्षेत्र बचाने में असफल रहे। अब संसद में गोरखपुर से सपा प्रत्याशी प्रवीण निषाद और फूलपुर से नागेंद्र पटेल प्रतिनिधित्व करेंगे।
प्रदेश की योगी सरकार के लिए दोनों सीटें हारना किसी तगड़े झटके से कम नहीं है। जहां एक तरफ उत्तरप्रदेश सरकार अपने एक वर्ष पूरे होने के जश्न की तयारी में है वहीं यह झटका उनके मिशन 2019 की सफलता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है। मुख्यमंत्री के लिए तो दोनों ही उपचुनाव प्रतिष्ठा का सवाल था क्योंकि वह कानून व्यवसथा समेत कई मुद्दे पर नाकाम सरकार को भी विकास वाली सरकार बता कर जीत का दावा कर रहे थे। लगभग 3 दशक से विपरीत परिस्थितियों में भी भगवामय रही गोरखपुर लोकसभा सीट से भाजपा की हार योगी आदित्यनाथ की उप्र की कमान सँभालने के एक वर्ष में ही अपना गढ़ बचाने में पहली ही असफलता साबित हुई है। हालाँकि इन दोनों नेताओं को स्थानीय निकाय चुनाव में अपना अपना गढ़ बचाने की चेतावनी मिल गयी थी। योगी आदित्यनाथ नगर निगम चुनाव में अपना वार्ड ही भाजपा को सफल बनाने में असफल थे और यहाँ से भाजपा उम्मीदवार माया त्रिपाठी को हरा निर्दलीय मुस्लिम महिला नादिरा खातून सफल हुई थी। वहीं उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के ग्रह जनपद कौशाम्बी में ही भाजपा के नगर पंचायत चुनाव में भाजपा का टिकट नकारते हुए कुछ उम्मीदवारों ने कहा था कि हम निर्दलीय जीत सकते हैं लेकिन पार्टी टिकट पर नहीं





