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भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में महती भूमिका निभाने वाले वैश्विक राजनीतिक जगत में भारत को स्थान प्रदान करने वाले भारत भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री पंडित जवाहर लाल नेहरु का जन्म-दिवस 14 नवम्बर को मनाया गया लेकिन उनकी मूर्तियों और जन्म-दिन के प्रति जिस उपेक्षित व्यवहार का निदर्शन किया गया वह काफी शर्मनाक है l बच्चों के प्रति प्रेम के लिए उन्होंने अपने जन्म-दिन को बाल दिवस के रूप में मनाए जाने की इच्छा व्यक्त की थी जिसे देश उसी रूप में लगातार मनाता चला आ रहा है लेकिन राजनीतिक दुर्भावना के कारण सत्तासीन दल उनकी मूर्तियों की साफ़-सफाई न कराकर देश के महापुरुष को तिरष्कृत कर रहे हैं l
कांग्रेस के विधि-विभाग के उपाध्यक्ष डी एस तिवारी ने जवाहर भवन में नेहरु प्रतिमा के चतुर्दिक एकत्र गंदगी के ढेर पर रोष व्यक्त करते हुए कहा कि नेहरु जैसा व्यक्तित्व जिसने देश के नवनिर्माण में अग्रणी भूमिका निभाई किसी एक दल या पार्टी की अमानत नहीं है पूरे देश की हैं लेकिन वर्तमान में प्रदेश और देश में सत्तारूढ़ राजनीतिक दल उनको पार्टी विशेष से जोड़कर उनको उपेक्षित कर रही है l
डी एस तिवारी ने कहा कि जिस समाज और देश में अतीत के प्रति उपेक्षा एवं तिरष्कार की भावना जन्म ले लेती है उसका भविष्य अन्धकार के गर्त में धीरे-धीरे विलीन हो जाता है लेकिन वर्तमान सत्तारूढ़ राजनीतिक दल अपने उपेक्षापूर्ण कृत्यों से अतीत को गंदगी के हवाले कर रहे हैं और दिखावा है कि वे भारत को ही स्वच्छ बनाने की उत्कंठा पाले हैं, जिला सचिव आर चंद्रा ने कहा कि प्रथम प्रधान-मंत्री की मूर्ति को गंदगी के हवाले करना दोहरी मानसिकता का परिचायक है जिससे बच्चों के मन-मस्तिष्क में विपरीत प्रभाव पडेगा और भविष्य प्रभावित होगा l
https://youtu.be/nQmSpXUsSTQ
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