मोहनलालगंज। बचपन मे हमारे अनेको साथियों में एक साथी गौरैया भी थी और हमारे खेल कूद का हिस्सा होती थी गौरैया । गर्मियों की छुट्टियों में हम सभी गौरेया को पकड़ अपने पसन्द के अलग अलग रंगों में रंग कर बांट लेते थे। और दादी माँ घर के बीच मे बने आंगन में प्रतिदिन गौरैया को चुनने के लिए दाने डालती थी। और हमारी ड्यूटी गौरैया के लिए पानी रखने की थी । लेकिन समय के साथ साथ जैसे जैसे हमारे घरों से आंगन गायब होते गए वैसे वैसे गौरैया भी हमसे रूठती चली गयी और आज हमारी आधुनिकता ने गौरैया को विलुप्त हो रही पक्षियों की श्रेणी में शामिल कर दिया। अनुमान के अनुसार शहरी क्षेत्र में गौरैया महज 20 प्रतिशत ही रह गयी है। वहीं आज भी गांवो में गौरैया की स्तिथ बहुत खराब नही है ।

लोग बचा रहे गौरैया को
अधिवक्ता सचिन जायसवाल ने बताया कि ये आज भी अपने घर के बाहर बने लॉन में प्रतिदिन गौरैया को दाने डालते है व इनके भट्टे पर रखे छप्पर पर पिछले दो वर्षों से गौरिया ने घोसले बना रखे है जिसमे अंडे व गौरैया के बच्चे भी रहते है जिसके चलते इन्होंने जर्जर होने के बाद भी छप्पर बदलने से मना कर दिया। व गौरैया के लिए पीने का पानी की भी व्यवस्था की है।
स्कूली बच्चो ने गौरैया बचाने की ली शपथ
विश्व गौरैया दिवस के मौके पर क्षेत्र के कई दयालपुर, निगोहां, टिकरा समेत सभी प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल के बच्चों व टीचरों ने विलुप्त हो रही गौरैया को संरक्षण देने व गौरैया को वापस लाने की शपथ ली ।
टिकरा स्कूल की अध्यपिका ने बताया कि इनके स्कूल के कक्षा पांच में कई साल से गौरैया ने घोसला बना रखा है। जिसमें गौरैया के अंडे भी है। साथ ही स्कूल ने घोसले के पास दाने व पानी की भी व्यवस्था कर रखी है।
हम भी लें प्रण
गौरैया को बचाने लिए हमे भी अपने दायित्यों को निर्वाहन करना आवश्यक है गर्मियों में अपने घरों की छत पर किसी बर्तन में पानी भरकर रखें व खाने के लिए कुछ अनाज के दाने भी डालें। खेतो ने कम से कम कीटनाशकों का प्रयोग करें।
राघवेंद्र तिवारी की रिपोर्ट
———————————————————————————————————————
अगर आप भी चाहते है अपने मोबाइल पर खबर तो तुरंत इस 9918956492 नंबर को अपने फ़ोन में अवधनामा के नाम से सेव करे और हमे व्हाट्सप्प कर अपना नाम और जिला बताये और पाए अपने फोन पर लेटेस्ट खबरे





