बृजेंद्र बहादुर मौर्य
गाय की सुरक्षा के लिए करेंगे उपवास-तारा पाटकर
गोरक्षा पदयात्रा महोबा से पहुंची लखनऊ

लखनऊ। देशी गाय संवर्द्धन के लिए बुंदेलखण्ड से निकली पदयात्रा गुरुवार को राजधानी के डॉलीगंज स्थित तारा मण्डल नक्षत्रशाला पहुंची । संयोजक तारा पाटकर ने कहा कि भूखे और पिछड़े बुंदेलखण्ड में अपने अस्तित्व को बचाने के लिए इधर-उधर मारी – मारी फिर रही देशी गाय की सुरक्षा, गौवंश की रक्षा के लिए पदयात्रा अभियान चलाया है। देश के प्रथम रोटी बैंक व बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने अपने सहयोगियों के साथ गुरु गोरखनाथ की तपोभूमि महोबा से 5 जून को जो गौरक्षा जागरूकता पद यात्रा शुरु की थी वह भीषण गर्मी के बावजूद 10 दिन में 250 किलोमीटर की दूरी तय कर लखनऊ पहुंची, जहां शुभ संस्कार समिति व संकल्प परिवार समेत कई सामाजिक संगठनों ने पदयात्री पाटेकर व उनके साथी जसवंत सिंह का भव्य स्वागत किया । पदयात्रा आलमबाग, चारबाग, हजरतगंज, परिवर्तन चौक होते हुए दोपहर को इंदिरा नक्षत्रशाला पहुंची । इस मौके पर पत्रकारों से बातचीत में पाटकर ने कहा कि हिंदुओं की पूजनीय देसी गाय का अस्तित्व ही इस वक्त जबरदस्त खतरे में है । उन्होंने कहा कि अभी तक कि अपनी पदयात्रा के दौरान मैनें पाया कि शहरों से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में तो देसी गाय दिखती ही नहीं और सब जगह सबसे ज्यादा भैंसे तथा उसके बाद जर्सी गाय दिखती है । गांवों में बस दो चार देसी गाय ही मिली और देसी गाय की हालत लुप्तप्राय प्राणियों जैसी हो गई है । कानपुर देहात में पतारा ब्लॉक के हिरनी गांव में जब हम पहुंचे तो पता चला कि 8000 आबादी वाले इस गांव में लगभग 6000 भैंस एवं 2000 जर्सी गाय हैं लेकिन देसी गाय बस एक ही मिली इसकी प्रमुख वजह देसी गाय की व्यवसायिक उपयोगिता का घटना है । भले ही देसी गाय के दूध में लाभकारी गुण हो लेकिन उचित महत्त्व ना मिलने की वजह से उसकी कीमत सबसे कम हो गई है । रोटी बैंक संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि भैंस के दूध में इतना अधिक फैट होता है कि हमारा पाचन तंत्र 9 घंटे में 70 फ़ीसदी दूध ही बचा पाता है जबकि गाय का दूध 2 घंटे में ही पूरा पच जाता है और तमाम रोगों से बचाता है । भैंस के दूध से गैस कब्जियत वह हृदय रोगा इत्यादि हो जाते है तो ऐसी हालत में देसी गाय हमारे लिए संकटमोचक बन सकती है । उन्होंने कहा कि भूखे वह बीमार बुंदेलखण्ड में देसी गाय बहुत अधिक संख्या में है लेकिन उनकी हालत सबसे ज्यादा खराब है । किसान खुद मुसीबत में है और पलायन करने को मजबूर है इसलिए उसने गायों को छोड़ दिया है । भूखे गाय- बैल भोजन की तलाश में खेतों की तरफ जाते हैं तो किसान बड़ी मेहनत से उगाई गयी अपनी फसल बचाने के लिए उनको खेतों से खदेड़ रहे हैं । वहां लगे कटीले तार गायों को घायल कर रहे हैं और मजबूरी में भूखी गए कूड़े के ढेर में जाकर खड़ी हो गई है तथा कागज पालिथीन बैग गंदगी का सेवन कर रही है । उनके सड़कों पर बैठने से रोज दुर्घटनाएं हो रही हैं । एक अनुमान के मुताबिक बुंदेलखंड में करीब 1लाख गाय व बछड़े आदि भूखे-प्यासे और मारे – मारे फिर रहे हैं । सरकार ने उनके पुनर्वास के लिए अब तक कोई प्रभावी कार्य योजना नहीं बनाई है। धीरे-धीरे यह समस्या और विकराल होती जा रही है इसीलिये संकट में फंसी गौमाता को बचाने के लिए ही यह पद यात्रा शुरु की गई है। पाटकर ने कहा इससे पूर्व 23 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जनता दरबार में मिलकर बुंदेलखण्ड की समस्याओं से उन को अवगत कराया गया लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है। अब हमने फैसला किया है कि पदयात्रा लखनऊ में 1 हफ्ते स्थगित रहेगी एवं प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री का ध्यान खींचने के लिए जीपीओ पार्क पर एक हफ्ते का उपवास करेंगे उसके बाद पद यात्रा गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ के लिए रवाना होगी । इस मौके पर शुभ संस्कार समिति के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत पांडे महामंत्री वृद्धि किशोर बोर्ड आशीष अग्रवाल राजेश आनंद संकल्प परिवार के लोग आदि उपस्थित रहे ।





