कबीर शांति मिशन ने मनाया अपना 28वां स्थापना दिवस
मिशन ने अपने पांच वरिष्ठ सदस्यों को ‘कबीर-दीप‘ सम्मान से अलंकृत किया।
दो पुस्तकों ‘स्वस्थ चिंतन के पथ पर‘ एवं ‘सार्थक जीवन के सिद्वांत‘ का लोकार्पण किया गया।
इस वर्ष की परिचर्चा का विषय था ‘सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय विकास‘।

लखनऊ : कबीर शांति मिशन ने अपना 28वां स्थापना दिवस दिनांक 24 अप्रैल 2018 (मंगलवार) को सिटी माण्टेसरी स्कूल, विशाल खण्ड, गोमतीनगर, लखनऊ के सभागृह में आयोजित किया। स्थापना दिवस के अवसर पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसका विषय था ‘सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय विकास‘। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय श्री राम नाईक राज्यपाल उत्तर प्रदेश थे। मुख्य वक्ता के रूप में पद्म श्री डा. मंसूर हसन प्रसिद्व ह्रदय रोग विशेषज्ञ ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकायुक्त न्यायमूर्ति श्री एस.सी.वर्मा ने की। इस अवसर पर मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री कृष्ण बिहारी अग्रवाल, श्री जगदीश गांधी, मुख्य संयोजक कबीर शांति मिशन श्री राकेश मित्तल एवं लखनऊ केन्द्र के संयोजक श्री राजेश अग्रवाल मंच पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मिशन के सदस्यों, मित्रों, एवं शुभचिंतको ने भाग लिया।

कार्यक्रम में मिशन की दो पुस्तकों ‘स्वस्थ चिंतन के पथ पर‘ एवं ‘सार्थक जीवन के सिद्वांत‘ के सप्तम संस्करणों का लोकार्पण किया गया। दोनों पुस्तकों के लेखक श्री राकेश कुमार मित्तल है। उनकी यह दोनों पुस्तकें अत्यन्त लोकप्रिय एवं उपयोगी रही है और लगभग 20 वर्षो से प्रचलित है। इन पुस्तकों में एक सफल व उपयोगी जीवन जीने के सिद्वांत अत्यन्त रोचक एवं सार गर्भित ढं़ग से प्रस्तुत किये गये है।
स्थापना दिवस के अवसर पर मिशन ने अपने पांच वरिष्ठ सदस्यों को ‘कबीर-दीप‘ सम्मान से अलंकृत किया। ये सदस्य है गोरखपुर के उद्यमी एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्री सुरेन्द्र कुमार अग्रवाल, लखनऊ विश्वविद्यालय की सेवा-निवृत्त प्रोफेसर साबरा हबीब, लखनऊ के प्रसिद्व साहित्यकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्री देवकी नन्दन शांत, मुजफ्फरनगर के प्रसिद्व चिकित्सक एवं सामाजिक कार्यकर्ता डा. गिरीश मोहन सिंघल एवं लखनऊ के शांति कंुज हरिद्वार के तत्वाधान में कार्यरत मेजर विजय कुमार खरे। इन सभी ने अपने अपने क्षेत्र में समाज की निस्वार्थ सेवा की है और अभी कर रहे है।
कार्यक्रम का प्रारंभ मिशन के मुख्य संयोजक श्री राकेश मित्तल के स्वागत सम्बोधन से प्रारम्भ हुआ जिसमंे परिचर्चा के विषय पर भी प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि आज समाज में अनेक कारणांे से विषमता एवं तनाव उत्पन्न हो रहा है जिसका प्रतिकूल प्रभाव राष्ट्र के विकास पर पड़ रहा है। ऐसी प्रवृत्तियांे को तभी समाप्त किया जा सकता है जब समाज में सकारात्मक चिंतन हो। मिशन की स्थापना वर्ष 1990 में इसी उद्देश्य से की गयी थी और इस प्रयास में मिशन एक बड़ी सीमा तक सफल रहा है।
परिचर्चा के विषय पर बोलते हुए मुख्य वक्ता डा. मंसूर हसन ने स्थिति की गहन व्याख्या की और बताया कि भारतीय समाज अपनी समरसता के कारण सभी क्षेत्रों में आगे रहा है। इसी कारण विदेशी ताकतों ने हम पर आक्रमण किया और अनेक शताब्दियों तक इस देश पर राज्य किया। सौभाग्य से इस दौरान भी हमारी संस्कृति एक बड़ी सीमा तक कायम रही, यद्यपि इसको नष्ट करने के बहुत संगठित प्रयास हुए। आज पुनः इस पर आक्रमण हो रहा है जिसके प्रति हमें शीघ्रतिशीघ्र उपयुक्त कदम उठाने होगें। उन्होंने कहा कि कुछ ही लोग देश की समरसता को नष्ट करने का प्रयास कर रहे है। ऐसे लोगों का सामना सभी को दृढ़तापूर्वक करना होगा।
मुख्य अतिथि माननीय राज्यपाल उत्तर प्रदेश श्री राम नाईक ने भी इस अवसर पर विस्तार में अपने विचार रखें। कबीर शांति मिशन के कार्यो की सराहना करते हुए उन्होंने अपने स्वयं के जीवन से कई ऐसे उदाहरण दिये, जब दृढ़तापूर्वक नकारात्मक तत्वों के विरूद्व कार्यवाही की गयी। उनका कहना था कि अच्छे लोगों की निष्क्रियता, बुरे लोगों को प्रोत्साहित करती है। अतः सभी सकारात्मक तत्वों को एक साथ मिलाकर नकारात्मक तत्वो का सामना करना होगा। ‘कबीर-दीप‘ से सम्मानित महानुभावों को बधाई देते हुए उन्होंने आशा व्यक्त की कि उनसे प्रेरित होकर अधिक से अधिक लोग स्वार्थहीन जीवन का प्रदर्शन करते हुए नई पीढ़ी के लिये उदाहरण बनेगें।
कबीर शांति मिशन अप्रैल 1990 में समाज में स्वस्थ विचार धारा को प्रोत्साहित करने हेतु स्थापित किया था। इस अवधि में मिशन ने गौरवमयी प्रगति की है और आज मिशन को समाज के सभी वर्गो का सहयोग प्राप्त है। इस समय मिशन के आजीवन सदस्यों की संख्या लगभग 2800 है और देश-विदेश में इसके 40 केन्द्र स्थापित है, मिशन द्वारा समान विचारधारा की अनेक संस्थाओं के साथ मिलकर भी कार्य किया है।
कार्यक्रम का समापन न्यायमूर्ति श्री एस.सी. वर्मा के अध्यक्षीय संबोधन से हुआ। उनका मानना था कि समरसता का प्रारंभ परिवार से किया जाना चाहिए और इसमे अच्छी शिक्षा का विशेष महत्व है। उन्होंने मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता एवं सभी अतिथियों के प्रति धन्यवाद भी व्यक्त किया। कार्यक्रम में लगभग 400 प्रबुद्वजन उपस्थित रहे।
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