महोबा। गुरू गोरखनाथ परिक्रमा समिति के तत्वावधान में शनिवार को बर्फीली हवाओं और ठंड के बीच प्रातः श्रद्धालुओं ने पौष माह की पूर्णमासी पर विश्व शांति के लिए गुरु गोरखनाथ की तपोस्थलीय ऐतिहासिक गोरख पर्वत की पैदल चलकर परिक्रमा लगाई। परिक्रमा में श्रद्धालु श्रद्धा, भक्ति, राम नाम की धुन व ओम नमः शिवाये उद्घोष के साथ हाथों में धर्मिक ध्वज लेकर परम्परागत मार्गों से होते हुए चल रहे थे।
परिक्रमा समाप्ति के बाद शिव मंदिर में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें पूर्णमासी के महत्व और श्रीराम, माता सीता व लक्ष्मण वनवास काल दौरान गोखारगिरि आने पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला साथ ही समिति प्रमुख ने लमटेरा प्रस्तुत कर प्रसाद वितरण किया। शिव तांडव मंदिर परिसर में आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए समिति प्रमुख डॉ. एलसी अनुरागी ने कहा कि शास्त्रों में कहा गया है कि पौष पूर्णिमा के दिन किए गए स्नान, दान और जप तप का फल कई गुना बढ़ जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा आदि पवित्र नदियों में स्नान करने से जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और मन निर्मल होता है। उन्होंने बताया कि चौदह वर्ष के वनवास काल के समय भगवान राम, माता सीता व लक्ष्मण इस पर्वत पर रहे थे, जिसका सीता रसोई व रामकुंड इसके जीवंत प्रमाण है और तभी से यह पर्वत कामदगिरि पर्वत की तरह पुन्य फल प्रदान करने वाला बन गया है। साध्वी सुनीता अनुरागी ने वाल्मीकि रामयण के राम आदर्श गुणों के श्लोक सुनाकर भक्तों को भाव विभोर कर दिया।
गोष्ठी में पंडित हरीशंकर नायक ने कहा कि इस पर्वत में गुरू गोरखनाथ तपस्यारत रहे और इस पर्वत के पश्चिम क्षेत्र में गुरू गोरखनाथ के शिष्य दीपकनाथ की चौकी आज भी प्रमाण स्वरुप स्थित है। अधिवक्ता दमुन्नालाल धुरिया ने कहा कि श्रीराम राष्ट्र की आत्मा है, उनके आदर्श अपनाने से राष्ट्र और अधिक मजबूत बनेगा। उन्होंने गोरखगिरि में वर्षा जल को रोकने के लिए चेकडैम निर्माण पर जोर दिया। इस मौके पर ओमप्रकाश, परशुराम अनुरागी, विनोद, पवन चौरसिया, गौरीशंकर सहित तमाम लोग मौजूद रहे।





