Wednesday, March 4, 2026
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200 करोड़ की आबादी और ग्लोबल GDP का 25% हिस्सा, PM मोदी ने ‘मदर ऑफ ऑल डील’ को बताया ऐतिहासिक समझौता

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-यूरोपीय यूनियन के ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को ‘मदर ऑफ ऑल डील’ बताया है। इंडिया एनर्जी वीक में उन्होंने कहा कि यह 20 साल बाद होने वाला समझौता है, जिससे व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी। इससे भारत में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और दोनों के बीच विश्वास बढ़ेगा।

यूरोपीय यूनियन के साथ भारत ऐतिहासिक ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ (India-EU FTA) करने जा रहा है और इसे मदर ऑफ ऑल डील (Mother of All Deal) करार दिया गया है। 20 साल के लंबे इंतजार और विचार-विमर्श के बाद यह डील फाइनल होने जा रही है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक में भारत-यूरोपीय यूनियन के बीच होने जा रही इस डील से भारत को होने वाले फायदों के बारे में बताया है।

पीएम मोदी ने कहा है कि भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच होने वाला FTA, दुनिया में 2 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच अहम समझौता होगा और इससे दुनिया में भारत को लेकर भरोसा और बढ़ेगा।

पीएम मोदी की नजर में मदर ऑफ ऑल डील की अहमियत

“प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यूरोपीय संघ के साथ हुआ समझौता वैश्विक जीडीपी का 25% और वैश्विक व्यापार का एक तिहाई हिस्सा है। यह समझौता भारत और यूरोप की जनता के लिए बड़े अवसर लेकर आएगा। यह दुनिया की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझेदारी का एक आदर्श उदाहरण है। पीएम मोदी ने कहा, “मैं कपड़ा, रत्न और आभूषण तथा चमड़ा क्षेत्रों को बधाई देता हूं, जिन्हें इस व्यापार समझौते से लाभ होगा।”

पीएम मोदी ने कहा कि ट्रेड और ग्लोबल चेन सप्लाई मजबूत होगी, देश में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को और बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारत में तेजी से रिफॉर्म हो रहे हैं और एफटीए से भारत और यूरोपीय देशों के बीच भरोसा और बढ़ेगा। पीएम मोदी ने कहा कि इस डील के लिए हमने नियमों में बदलाव किए हैं।

क्या है भारत-यूरोपीय यूनियन FTA?

भारत-यूरोपीय यूनियन, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी मुक्त व्यापार समझौते में दोनों पक्ष इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती और अन्य व्यापारिक बाधाओं कम करेंगे, जिससे दोनों ओर से आयात व निर्यात होने वाले सामानों पर लगने वाले शुल्क में कमी आएगी और यह सस्ती हो जाएंगी। अमेरिकी टैरिफ और व्यापारिक अनिश्चितता व चीन की चुनौती के बीच भारत व यूरोपीय यूनियन के बीच यह डील गेमचेंजर मानी जा रही है। क्योंकि, यह समझौता 200 करोड़ से ज्यादा लोगों का एक इंटीग्रेटेड मार्केट बनाएगा।

भारत-यूरोपीय यूनियन FTA से क्या बड़े फायदे

ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर, राहुल सिंह ने कहा है कि भारत–यूरोप फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-EU FTA) का असर सिर्फ ट्रेड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे रोजगार और स्किल डिमांड दोनों में तेज़ उछाल आएगा।

यूरोपीय कंपनियों की भारत में एंट्री से मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, एआई और सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टर्स में हाई-स्किल टैलेंट की ज़रूरत बढ़ेगी।

सरकार का फोकस जिस तरह स्किल डेवलपमेंट, अप्रेंटिसशिप और इंडस्ट्री-लिंक्ड ट्रेनिंग पर दिख रहा है, अगर बजट में इन क्षेत्रों को मजबूत फंडिंग मिलती है तो इस डील का लाभ सीधे युवाओं तक पहुंचेगा।

यूरोपीय स्टैंडर्ड्स के अनुरूप करिकुलम और ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग भारत को ग्लोबल टैलेंट हब बना सकती है।

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