Thursday, April 2, 2026
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डांट नहीं, सही रूटीन की है जरूरत, 5 प्वाइंट में समझें ऑटिस्टिक बच्चों की कैसे करें देखभाल

ऑटिस्टिक बच्चों की देखभाल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन उनकी जरूरतों को समझकर उनके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है।

ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं है, बल्कि दिमाग के विकास का एक अलग तरीका है। इसलिए ऑटिस्टिक बच्चों को समझना और उन्हें सपोर्ट करना बेहद जरूरी है। माता-पिता के लिए यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन बच्चों की जरूरत के अनुसार उनके आसपास की दुनिया को ढालना काफी मददगार साबित हो सकता है।

डॉ. अमिताभ साहा (असोशिएट डायरेक्टर एंड क्लीनिकल एडमिनिस्ट्रेटर, मेंटल हेल्थ एंड बिहेवियरल साइंस, मैक्स सुपर स्पेशेलिटी हॉस्पिटल, वैशाली) बताते हैं कि आज के दौर में वर्जुअल मीडिया का बढ़ता प्रभाव भी बच्चों और युवाओं के सामाजिक व्यवहार पर असर डाल रहा है।

इसके कारण उनकी बातचीत और लोगों से मेलजोल के तरीके काफी प्रभावित होते हैं, जिससे सामाजिक जुड़ाव में कमी देखी जा सकती है। ऑटिस्टिक बच्चों को सपोर्ट करने के लिए पेरेंट्स को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

रूटीन बनाएं

ऑटिस्टिक बच्चों के लिए एक फिक्स रूटीन बहुत जरूरी है। जब बच्चों को पता होता है कि स्कूल, खेल और सोने का समय कब है, तो उनका डर कम होता है और वे ज्यादा सहयोग करते हैं। आप तस्वीरों या चार्ट के जरिए उन्हें समझा सकते हैं कि आगे क्या होने वाला है।

बातचीत के मामले में यह याद रखना जरूरी है कि हर बच्चा बोलकर अपनी बात नहीं कहता। वे इशारों, तस्वीरों या साइन लैंग्वेज का इस्तेमाल कर सकते हैं। उनसे बात करते समय हमेशा आसान वाक्यों का इस्तेमाल करें और उन्हें समझने के लिए पूरा समय दें।

सेंसरी जरूरतों को समझें

जब बच्चा कोई अच्छा काम करे, तो उसकी तुरंत तारीफ करें। उनकी कोशिशों की सराहना करना सबसे जरूरी है। सजा देने के बजाय उन्हें प्रोत्साहित करें, क्योंकि सजा से उनमें घबराहट बढ़ सकती है। इसके साथ ही, उनके आसपास के माहौल का ध्यान रखें। कई बच्चों को तेज आवाज या चमकदार रोशनी से परेशानी होती है। उनके लिए शांत जगह, नरम कपड़े और जरूरत पड़ने पर सेंसरी ब्रेक, जैसे- गहरी सांस लेना या शांत बैठने की व्यवस्था करें।

नींद, पोषण और सामाजिक मेलजोल

नींद की कमी बच्चों के सीखने की क्षमता को प्रभावित करती है, इसलिए सोने का समय तय करें और शाम को स्क्रीन से दूर रहें। खान-पान के मामले में नई चीजों को धीरे-धीरे शामिल करें, उन पर जबरदस्ती न करें।

सामाजिक विकास के लिए उन्हें छोटे ग्रुप में या किसी धैर्यवान साथी के साथ खेलने का मौका दें। बड़े ग्रुप के बजाय छोटे और शांत वातावरण में वे बेहतर तरीके से सोशल स्किल सीख पाते हैं।

एक्सपर्ट की मदद और माता-पिता का स्वास्थ्य

एक अच्छी टीम जैसे स्पीच थेरेपिस्ट और बिहेवियर स्पेशेलिस्ट के साथ मिलकर काम करना बच्चे के भविष्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में माता-पिता को अपना ख्याल रखना भी नहीं भूलना चाहिए। देखभाल करने वालों का मानसिक रूप से स्वस्थ होना बच्चे की प्रगति के लिए अनिवार्य है। मदद मांगने या बीच-बीच में ब्रेक लेने में संकोच न करें।

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