इटावा। विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर सामाजिक वानिकी प्रभाग एवं जिला गंगा सुरक्षा समिति के तत्वाधान में गुरुवार को पूर्व माध्यमिक विद्यालय राजा का बाग में जागरूकता गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए इं.प्रधानाचार्या वासिफा तबस्सुम ने छात्र-छात्राओं से कहा कि गौरैया चिड़िया घरों से तो लुप्त होती जा रही है और गांव में भी इसके घरौंदे अपेक्षाकृत कम ही हैं हमें घरेलू चिड़िया को बचाने के लिए प्रयास करना चाहिए अगर हम प्रतिदिन थोड़ा अनाज और बर्तन में पानी रखें तो इनकी बहुत बड़ी सहायता होगी क्या पता रुठा मेहमान हमारे घर आंगन में फिर फुदकने लगे।पर्यावरणविद् संजय सक्सेना ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा जब हम सब अपनी छतों पर अनाज सुखाते थे जिससे इन्हें भोजन प्राप्त हो जाता था फसलों में पाए जाने वाले कीड़े मकोड़ों को गौरैया खाकर हमारे अनाज को नुकसान से बचाती थी।
कि हम सबको पर्यावरण को स्वच्छ एवं शुद्ध रखने का संकल्प लेना चाहिए और अपने घरों में इसको रहने के लिए उपयुक्त स्थान पर एक घोंसला लगाकर संरक्षण प्रदान करना चाहिये।संजीव चौहान ने बताया कि गौरैया की आवाज़ बहुत सुंदर होती है और उनकी चहचहाहट और गायन हर जगह सुना जा सकता है।अन्य अनूठी विशेषताएं उनके चिकने गोल सिर और गोल पंख हैं।नर की पीठ पर लाल पंख होते हैं और मादा भूरे और धारीदार होती हैं।जेआरएफ डॉ.संगीता ने कहा कि गौरैया चिड़िया बचाने का संदेश देना ही एकमात्र लक्ष्य नही है सबसे महत्वपूर्ण है कि अपने आस पास पाए जाने वाले सभी जीव जंतुओं के प्रति संवेदनशील बने।
कार्यक्रम के दौरान वन विभाग द्वारा स्कूली बच्चों को को गौरैया के घोसले वितरण किए गए।कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय,स्कॉन एवं वन विभाग के पदाधिकारी शरद दीक्षित,वन दरोगा रविंद्र मिश्रा,ज्योति वर्मा,शिवांगी,दीपिका, इरफ़ान आवेश कुमार एवं अनुज तिवारी का उल्लेखनीय योगदान रहा।
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