केचुआ खाद उत्पादन के लिए दिया गया प्रशिक्षण

जैविक खेती करने के लिए जरूरी है केचुआ खाद 
 
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केचुआ खाद उत्पादन के लिए दिया गया प्रशिक्षण 

अवधनामा संवाददाता

बांदा। कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कृषि महाविद्यालय के मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग द्वारा जिला मिशन प्रबंध इकाई, उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त तत्वावधान में महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना के अंतर्गत जैविक खेती के लिए केंचुआ खाद का उत्पादन एवं महत्व विषय पर विकास खंड बड़ोखर खुर्द की कृषि एवं पशु सखियों के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण 22 सितम्बर से 26 सितंबर तक विश्वविद्यालय के कुलपति डा. यूएस गौतम के निर्देशन एवं डिप्टी कमिश्नर, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, कृष्ण करुणाकर पांडेय के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि, कुलसचिव डा. एसके सिंह ने बुंदेलखंड में जैविक कृषि में केंचुआ खाद के महत्व को बताया। प्रतिभागियों को समूह में गृह उद्योग के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डा. नरेंद्र सिंह, सह निदेशक प्रसार ने प्रतिभागियों द्वारा कार्य को स्वयं करके सीखने पर जोर देते हुए कहा कि आप सभी अपने क्षेत्र के अग्रणी महिलाएं हैं, जो आज प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने क्षेत्र के विकास में सहायक सिद्ध होंगी। 
प्रशिक्षण के आयोजक सचिव एवं कोर्स डायरेक्टर डा. देवकुमार ने बताया कि जनपद के सभी आठ विकास खण्डों की कृषि एवं पशु सखियों का प्रशिक्षण विभिन्न चरणों में किया जाना है, जिसमें से प्रथम चरण में बड़ोखर खुर्द की 72 का प्रशिक्षण कोरोना प्रोटोकाल का पालन करते हुए दो बैच में कराना निश्चित किया गया है। प्रथम बैच के प्रशिक्षण में 35 प्रतिभागियों द्वारा सहभागिता की गई। पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को केंचुआ खाद उत्पादन की तकनीकियों, उत्पादन विधि, पोषण वाटिका की स्थापना, बीज उपचार से रोग एवं पोषण प्रबंधन, पशु पाठशाला, पशु आहार, आवास एवं चारा प्रबंधन, पशु रोग एवं स्वास्थ्य प्रबंधन, एकीकृत कृषि प्रणाली, तरल बायो उर्वरक निर्माण, जैविक खेती का महत्व पोषक तत्व प्रबंधन, केचुआ खाद विपरण, मृदा स्वास्थ्य आदि पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रायोगिक स्तर पर दिया गया। प्रशिक्षणार्थियों ने पांच दिवसीय प्रशिक्षण की विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। केंचुआ खाद उत्पादन, प्रयोग एवं विपरण की बारीकियों को सीखा। प्रशिक्षणार्थियों उर्मिला एवं कमलेश ने अपने विचार प्रकट किए। जिला मिशन प्रबंधक, आजीविका सुनील कुमार सिंह ने प्रशिक्षणार्थियों को सीखी गई तकनीकों को उद्यम के रूप में अपनाकर आय सृजन के लिए प्रेरित किया। मोहन सिंह ने उच्च स्तरीय प्रशिक्षण के आयोजन के लिए आभार जताया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. जीएस पवार, विभागाध्यक्ष, मृदा विभाग डा. जग्गनाथ पाठक, विभागाध्यक्ष, कृषि प्रसार डा. भानु मिश्रा, मृदा विज्ञान विभाग के डा. जेके तिवारी, डा. आनंद चौबे, डा. अरविंद कुमार गुप्ता, गृह विज्ञान महाविद्यालय से डा. सौरभ, डा.दीप्ति भार्गव, डा. प्रज्ञा ओझा तथा एनआरएलएम, अमित कुमार चौहान, प्रभात कुमार, बीएमएम, आजीविका, प्रभास कुमार, मो. हामिद, प्रेम कुमार, अशोक का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन डा. अमित मिश्रा द्वारा किया गया। सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र एवं केचुआ उत्पादन प्रारंभ करने के लिए केंचुआ का कल्चर बैग भी दिया गया।