कपड़े, फुटवियर व ईंट पर जीएसटी बढ़ाने से आक्रोशित हुये व्यापारी

व्यापारियों का उत्पीडऩ बर्दाश्त नहीं करेगा व्यापार सभा: प्रदीप चिगलौआ

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कपड़े, फुटवियर व ईंट पर जीएसटी बढ़ाने से आक्रोशित हुये व्यापारी

अवधनामा संवाददाता

ललितपुर। कपड़े, फुटबियर व ईंट पर जीएसटी बढ़ाये जाने के विरोध में समाजवादी व्यापार सभा ने जिलाध्यक्ष प्रदीप जैन चिगलौआ के नेतृत्व में केन्द्रीय वित्त मंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से भेजा है। ज्ञापन में बताया कि कपड़े व फुटवियर पर 1 जनवरी 2022 से जीएसटी बढ़ाने व ईंट पर भी जीएसटी बढ़ाने के भाजपा सरकार के निर्णय का समाजवादी व्यापार सभा उत्तर प्रदेश विरोध करती है। कहा कि वर्तमान सरकार में नोटबन्दी, जीएसटी, लॉकडाउन से पहले ही व्यापारी बर्बाद हो चुके हैं। व्यापारी विरोधी नीतियों से जन्मीं परिस्तिथियों की वजह से व्यापारी आत्महत्या तक के लिए मजबूर हुए हैं । सरकार की गलत नीतियों के कारण व्यापारी बर्बाद हैं और अपने अस्तित्व के लिए चिंतित है और ऐसे में राहत देने की जगह सरकार जीवनयापन के लिए सबसे अहम कपड़े, ईंट व फुटवियर (जूती, चप्पल आदि) पर टैक्स 5 की जगह 12 प्रतिशत बढ़ाया गया है। इस व्यापार से जुड़े दुकानदारों, उद्यमियों व भट्टा मालिकों को मौत की शैया पर धकेलने का काम कर रही है। कपड़े, ईंट व फुटवियर पर जीएसटी 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12  प्रतिशत करना भाजपा की सरकार की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। इससे कपड़े, कम्बल, पर्दे, सुतली की नुकीले जाल, रस्सी, तिरपाल, शामियाना, जूते, हवाई चप्पल, ईट इत्यादि सभी सामान महंगे हो जाएंगे। व्यापार के लिए परेशान छोटे व मध्यमवर्गीय व्यापारी इससे बर्बाद हो जाएंगे। बड़ी ब्रांडेड कंपनियों व विदेशी कंपनियां ही इससे फायदे में रहेंगी क्योंकि छोटा व्यापारी बढे टैक्स के अनुरूप कपड़े, जूते या चप्पल की कीमत तो बढ़ा नहीं पाएंगे और बड़ी कंपनियां इसका फायदा उठाएंगी क्योंकि उनका मार्जिन पहले ही बड़ा होता है और वो इसमें बढ़े जीएसटी को भी समायोजित कर लेंगी। इससे छोटे व्यापारियों व उद्योगों को बड़े व विदेशी ब्रांडों से मुकाबला करना और कठिन हो जाएगा। पहले ही जूते चप्पल की बनवाई में जरूरी कच्चे माल की कीमत एक साल में तीन गुना बढ़ गई है। साथ ही कपड़े व फुटवियर व्यापार में आईटीसी सम्बंधी बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। कपड़े, जूते, ईट व चप्पल को आप मर्सिडीज गाड़ी की तरह नहीं देख सकते। सरकार को कोई सरोकार व्यापारी व जनता की कठिनाई को लेकर नहीं है। सरकार को तो कच्चे जीएसटी कम कर व्यापारियों को राहत देनी चाहिए। इस निर्णय से इंस्पेक्टराज बढ़ेगा जिससे की उत्पीडन बढ़ेगा। पहले से ही परेशान छोटा व मध्यम व्यापारी जीएसटी के नाम पर और उत्पीडऩ नहीं बर्दाश्त कर पाएगा। ये टैक्स बढ़ा तो एमएसएमई इकाइयों व ईट भ-े की बंदी तय है। हवाई और प्लास्टिक चप्पले तो बेसिक श्रेणी में आती है। जीएसटी से पहले 300 तक की चप्पल पर टैक्स भी नहीं पर था 15 प्रतिशत टैक्स से ही कई समस्याएं उत्पन्न हुई और अब 12 प्रतिशत से तो इसका सीधा भार गरीब पर पडेगा देश का 85 प्रतिशत वर्ग सस्ता कपड़ा व चप्पलें पहनता है। 12 प्रतिशत टैक्स के बाद कपड़े व फुटवियर की बड़ी व छोटी कंपनिया सब एक ही श्रेणी में आ जाएंगी । कोयला , डीजल व पेट्रोल कीमत में बेतहाशा बढ़ोतरी जारी है। नोटबन्दी, विसंगतिपूर्ण जीएसटी व कोरोना से व्यापारी उबर भी नहीं पाया की सरकार ने जीएसटी बढ़ाने की घोषणा कर दी । इससे व्यापार पर असर पड़ेगा। जीएसटी की दर बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। ई-कॉमर्स कंपनियों ने पहले ही व्यापार पर प्रतिकूल असर डाल रखा है। अब जो वर्ग ऑफलाइन खरीदारी ज्यादा करता है, उसकी जेब पर भी बोझ बढ़ेगा। राष्ट्रहित में व छोटे व्यापारियों के हित में कपड़े, ईंट व फुटवियर पर टैक्स बढ़ोत्तरी के निर्णय को वापस लेकर जीएसटी सरलीकरण पर ध्यान दिये जाने की मांग उठायी है। समाजवादी व्यापार सभा ने केन्द्रीय वित्त मंत्री से कार्यवाही की मांग उठायी है। ज्ञापन देते समय जिलाध्यक्ष प्रदीप जैन चिगलौआ, स्नातक विधायक प्रतिनिधि विजय यादव, रामप्रताप सिंह, टिंकू बड़घरिया, अमित कुशवाहा, संतोष साहू खजुरिया, पंकज श्रीवास, माताब सिंह, आशीष जैन, प्रदीप, पवन तिवारी एड., तिलक सिंह यादव एड. के अलावा अनेकों व्यापारी नेता मौजूद रहे।