जो क़ौमें वक़्त की क़ीमत नहीं जानती और सुस्ती का शिकार होती हैं वो कभी तरक्क़ी नहीं कर पाती-मौ० अली अब्बास

सिर्फ़ ज़बानी दीन न अपनाएं  हबीब इब्ने मज़ाहिर की तरह किरदार निभाएं

 | 
जो क़ौमें वक़्त की क़ीमत नहीं जानती और सुस्ती का  शिकार होती हैं वो कभी तरक्क़ी नहीं कर पाती-मौ० अली  अब्बास 

अवधनामा संवाददाता 

बाराबंकी (Barabanki)। हक़ की राह में अपना पहला क़दम निकालो , मंज़िल तक पहुंचाने का काम अल्लाह का है।दुनियां की हर मखलूक जो इल्म भी नहीं रखती वख़्त के हिसाब से चलती है। मगर इंसान जिसे परवरदिगार ने इल्म से नवाज़ा वो जब वो वख़्त का ख़याल नहीं करता तो पस्ती की तरफ़ चला जाता है । जो वख़्त का ख़याल करते हुए सुस्ती से दूर रहता है कामयाबी उसके क़दम चूमती है। यह बात लाइन पुरवा में हो रहे अशरे की मजलिस को खि़ताब करते हुए आली जनाब खतीबे अहले बैत अली अब्बास ने कही। उन्होंने यह भी कहा कि कामयाबी चाहिए तो मुत्तहिद हो जाओ बिना इत्तेहाद के कामयाबी मुमकिन नहीं । सिर्फ़ ज़बानी दीन न अपनाएं  हबीब इब्ने मज़ाहिर की तरह किरदार निभाएं । हुर की तरह अपनी फ़िक्रों को बनाएं लम्हों में  कामयाबी पाएं । आखिर में करबला वालों के मसायब पेश किए जिसे सुनकर सभी रोने लगे।मजलिस से पहले कशिश संडीलवी , बाक़र नक़वी , मुजफ्फर इमाम , मेहदी नक़वी , हाजी सरवर अली करबलाई, कामयाब संडीलवी, गा़ज़ी इमाम व मोहसिन इमाम ने नज़रानये अक़ीदत पेश किया। मजलिस का आग़ाज़ तिलावत ए कलाम ए इलाही से मोहसिन इमाम  ने किया। अन्जुमन ग़ुन्चये अब्बासिया ने नौहा खानी व सीनाज़नी की ।बानिये मजलिस ने सभी का शुक्रिया अदा किया।