शिक्षक अपने छात्रों के लिए एक रोल मॉडल की मानिंद

यूजीसी के चेयरमैन प्रो. धीरेंद्रपाल सिंह का शिक्षक दिवस पर सारगर्भित संदेश

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शिक्षक अपने छात्रों के लिए एक रोल मॉडल की मानिंद

अवधनामा संवाददाता

(प्रो. श्याम सुंदर भाटिया)

डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन का किया भावपूर्ण स्मरण
चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण
कुशाग्रबुद्धि वालों को बनना चाहिए टीचर्स
एनईपी 2020 में शिक्षा और शिक्षकों की गुणवत्ता पर जोर
यूजीसी ने नए शिक्षकों के लिए विकसित किया गुरु दक्षता फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम

नई दिल्ली (New Delhi) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग - यूजीसी के चेयरमैन प्रो. धीरेंद्रपाल सिंह का मानना है,शिक्षक अपने छात्रों के लिए एक रोल मॉडल की मानिंद होते हैं,क्योंकि युवाओं के चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। शिक्षक दिवस पर देश और दुनिया के शिक्षकों के नाम वीडियो संदेश का श्रीगणेश प्रो.सिंह ने जाने - माने दार्शनिक, शिक्षाविद एवम् पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के भावपूर्ण स्मरण के साथ किया।

यूजीसी के चेयरमैन प्रो. सिंह ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के हवाले से कहा,वह मानते थे- देश के कुशाग्र बुद्धि वालों को ही टीचर होना चाहिए, क्योंकि वैश्विक विकास और मानव जाति के भविष्य निर्माण में शिक्षकों का योगदान सर्वोपरि होता है। उन्होंने डॉ. राधाकृष्णन को कोट करते हुए कहा,वह कहते थे - शिक्षक वह नहीं है,जो छात्रों के दिमाग में तथ्यों को जबरिया ठूसे,बल्कि सच्चा शिक्षक वह है,जो आने वाले कल की चुनौतियों के लिए छात्रों को तैयार करे।

उन्होंने आदर्श शिक्षक को परिभाषित करते हुए कहा,नैतिक चरित्र के साथ - साथ छात्रों का शारीरिक,मानसिक और बौद्धिक व्यक्तित्व विकास करना उनका मुख्य उद्देश्य होता है। प्रो. सिंह बोले,अपने शिक्षकों से प्राप्त ज्ञान न केवल छात्रों को व्यावहारिक दुनिया के लिए अनुकूल बनाता है,बल्कि उनके दृष्टिकोण और व्यवहार में सामाजिक और नागरिक जिम्मेदारियों की भावना विकसित करने में मदद भी करता है।

यूजीसी के चेयरमैन प्रो.सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति - 2020 की पुरजोर पैरवी करते हुए कहा, एनईपी में शिक्षा और शिक्षकों की गुणवत्ता पर जोर दिया गया है,इसीलिए यूजीसी ने गुरु दक्षता नामक फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम नए शिक्षकों के लिए विकसित किया है। उन्होंने अपने संबोधन के अंत में शिक्षकों को आह्वान किया,आइए...हम सब मिलकर शिक्षा के जरिए राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका सुनिश्चित करें। उन्होंने अपने इस हृदयस्पर्शी संदेश का शुभारंभ नमस्ते और जय हिंद से समापन किया।

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