मण्डी शुल्क के साथ इंस्पेक्टर राज को समाप्त करे प्रदेश सरकार : मण्डल

जिला उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

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मण्डी शुल्क के साथ इंस्पेक्टर राज को समाप्त करे प्रदेश सरकार : मण्डल
अवधनामा संवाददाता 

ललितपुर। मण्डी शुल्क के साथ ही इंस्पेक्टर राज को समाप्त किये जाने की मांग को लेकर जिला उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन कृषि उत्पादन मण्डी समिति सचिव के जरिए भेजा है। ज्ञापन में बताया कि वर्ष 1972 में कृषि उत्पादन मण्डी समिति अधिनियम प्रदेश में किसानों की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुये बनाया गया और कृषि मण्डियों की स्थापना की गई। जिसका एक मात्र उददेश्य था कि प्रदेश के किसान जनपद तहसील स्तर पर बनी कृषि उत्पाद मण्डियों मे अपनी उपज को बेच सकें और मण्डियों को संचालित करने, रखरखाव, कर्मचारियों के वेतन एवं विकास के उददेश्य से 10 पैसे मण्डी शुल्क लगाया गया था किन्तु प्रदेश सरकार ने इसे अब अपनी आय का जरिया बना लिया है। और वह इसे कर के रूप में देखने लगी है जो अपने मूलभूत उद्देश्यों से भटक गई है। उ.प्र. उद्योग व्यापार मण्डल बड़े लम्बें अरसे से प्रदेश में मण्डी शुल्क की समाप्ति के लिए आंदोलन कर रहा था। इस बीच 05 जून 2020 को प्रधानमंत्री ने सम्पूर्ण देश से मण्डियों का लाइसेन्स 9-आर, 6-आर व गेटपास व अन्य प्रावधानों को पूर्णत: समाप्त कर दिया, जिससें आम व्यापारी को बडी राहत मिली एवं भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा। व्यापार मण्डल मण्डी समिति के अन्दर लग रहे शुल्क की समाप्ति की बात भी सदैव उठाता रहा है। जैसा कि विदित है कि कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद प्रदेश में मण्डी शुल्क की पुरानी व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गयी है जिससे उद्योग जगत एवं व्यापारी समाज में बडा रोष व्याप्त है। बताया कि कई राज्यों विशेषकर निकटवर्ती राज्यों में मण्डी शुल्क नही है कई राज्यों में उद्योगों में छूट है, और जब प्रदेश में मण्डी श्ुाल्क नही था तों अनेक उद्यमियों ने यहां पर अपना उद्योग भी स्थापित किया जो कि अब अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे है। मण्डी अधिनियम में साफ लिखा है कि जो जिंस जिस प्रदेश में उत्पाद होगी उस पर वहॉ मण्डी शुल्क लगेगा परन्तु अब देश व प्रदेश के बाहर से आने वाली जिंसों पर भी शुल्क लग रहा है जैसे कि किराना (मेवा, सुपारी, काली मिर्च, मसाले) आदि वस्तुओं पर मण्डी शुल्क लग जायेगा जो कि असंवौधानिक है।

महोदय मण्डियों में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है जितनी फीस सरकार को मिलती है उससे कई गुना पैसा मण्डी सचिव व कर्मचारियों को जाता है। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने इस बात को समझा था तभी उन्होने इतना अच्छा निर्णय लिया और हम लोगो ने उनको बधाई भी दी थी। आप भी दिन रात एक करके प्रदेशवासियों की सेवा में लगें है और उ0प्र0 को 'ईज टू बिजनेस' में दूसरे नम्बर पर ले आये है। इस प्रकार के कानून लाने से भ्रष्टाचार बढेगा मंहगाई बढेगी चूंकि ये टैक्स किसानों से वसूल कर सरकार को देना होता है इसलिए किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य भी नही मिल पायेगा साथ ही व्यापारियों को अनावश्यक लिखा पढी, सचल दल का भय सरीखे उत्पीडन का सामना करना पडेगा। इसके साथ ही मण्डी समिति के द्वारा आधी अधूरी तैयारी के साथ में केवल सरकार को खुश करने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था चालू करने का फरमान भी जारी कर दिया गया है जिसमें कई खामियां है। चुनाव को देखते हुए चुनाव आयोग ने भी सारे मण्डी स्थल को अधिग्रहण कर कार्यवाही प्रारम्भ कर दी है। गल्ला मण्डियों को अधिग्रहस्थ करने से गल्ला व्यापारियों का आर्थिक नुकसान भी होता है और काफी दिनों तक मण्डिया बंद भी रहती है इसका कोई मुआवजा व्यापारियों को नही दिया जाता है, इसलिए इसको मण्डी स्थल से छोड़कर अन्य किसी स्थान का उपयोग किया जाए। मड़ावरा कृषि मंडी क्षेत्र के व्यापारियों के मंडी लाईसेन्स का नवीनीकरण नहीं किया जा रहा है जिससे 55 फुटकर व्यापारी अपने लाईसेन्सों के नवीनीकरण हेतु परेशान है जबकि शासन द्वारा लाईसेंस के नवीनीकरण हेतु निर्देश जारी किए गए हैं किन्तु उप जिलाधिकारी मड़ावरा द्वारा व्यापारियों को उत्पीडि़त किया जा रहा है और उनके लाईसेन्स नवीनीकरण कराने में बाधा पहुॅचाई जा रही है। व्यापारियों ने मुख्यमंत्री से आह्वान किया कि प्रदेश में मण्डी शुल्क समाप्त कर दिया जायें मण्डी के अन्दर कार्य करने वाले व्यापारियों को लाइसेन्स जारी करके रखरखाव (मेंटीनेन्स) के रूप में 0.5 प्रतिशत ले लिया जाये । मण्डी की दुकानों को फ्री होल्ड रजिस्ट्री करा दी जायें जिससे सरकार पर खर्चे का भार नही पड़ेगा, राजस्व की प्राप्ति भी होगी और प्रदेश का व्यापारी आजादी से अपना व्यापार करके प्रदेश को आत्मनिर्भर प्रदेश बनाने में अग्रसर व उद्यत होगा। मड़ावरा के फुटकर गल्ला व्यापारियों के लाईसेन्स अविलम्ब नवीनीकृत कराये जायें। इस दौरान प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेन्द्र जैन मयूर, गल्ला मंडी अध्यक्ष अशोक जैन अनौरा, संजीव जैन, प्रसन्न कुमार जैन, संतोष चौबे, अमित जैन, अरविन्द कुमार, राजेंद्र जैन, मुन्नालाल, जितेंद्र, मनोज कुमार जैन, सौरभ जैन पीलू, रामप्रकाश साहू, केशव साहू, अंकेश साहू, संतोष कुमार, रावेन्द्र साहू, शैलेश साहू, रविन्द्र जैन, पवन कुमार, दयाराम, प्रदीप जैन, मूलचन्द्र साहू, देवेन्द्र कुमार जैन, कैलाश एंड ब्रदर्स आदि उपस्थित रहे।