सामाजिक संगठनों ने बिरसा मुंडा की मनाई जयंती , पदचिन्हों पर चलने का लिया संकल्प

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सामाजिक संगठनों ने बिरसा मुंडा की मनाई जयंती , पदचिन्हों पर चलने का लिया संकल्प
अवधनामा संवाददाता

प्रयागराज । जनपद के विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से आदिवासियों (जनजातियों) के नेता बिरसा मुंडा की जयंती सादगीपूर्ण ढंग से पूरादले स्थित परेड ग्राउण्ड में मनाई तथा उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया उक्त अवसर पर डा. अम्बेडकर वेलफेयर एसोसिएशन (दावा), भारतीय बौद्ध महासभा, अम्बेडकर मिशन, प्रबुद्ध फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बसपा के जमीनी नेता मौजीलाल गौतम ने बताया कि आदिवासियों के जननायक विरसा मुण्डा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस घोसित करने के वाबत वर्तमान बीजेपी सरकार से आदिवासी समाज पूछना चाहता है कि क्या देश के सभी आदिवासी जनजातीय सूची में है? यदि नहीं है तो किस आधार पर जनजातीय गौरव दिवस घोसित किया जा रहा है। इस दिवस की घोषणा का अर्थ तो यही हुआ की जो आदिवासी जनजातीय सूची में है वे गौरव महसूस करे और जो आदिवासी जनजातीय सूची में नहीं है उनके लिए गौरव जैसा कुछ नहीं,, राजनेताओ को कम से कम आदिवासियों की इच्छा को समझना चाहिए।
पूरादालेल निवासी बसपा के युवा नेता उपेन्द्र कुमार ने बताया कि क्या असम के मुंडा, उरांव, संथाली इत्यादि जनजातीय सूचि में है? नहीं है अर्थार्त उनके लिए यह दिवस जनजतीय गौरव दिवस नहीं होगा? जनजातीय गौरव दिवस क्या सिर्फ जनजातीय सूची में आने वालो के लिए मात्र है? असम के मुंडा आदिवासी धरती आबा बिरसा मुंडा जयंती को किस तरह मनाएंगे ?
दिवाकर आदिवासी ने बताया कि धरती आबा बिरसा मुंडा सिर्फ देश के जनजातीय वर्ग के ही मसीहा थे? जो जनजातीय गौरव दिवस कहा जा रहा है। सभी प्रश्नो का उत्तर तो आदिवासी को चाहिए क्योंकि कोई भी राजनेता आदिवासी नायक वीर पुरुष, अमर पुरखा के जयंती को जनजातीय गौरव दिवस घोसित कर, इस दिन को जनजातीय वर्ग तक सिमित कर रहा है, क्या धरती आबा बिरसा मुंडा जनजातियो तक ही सिमित है?
 एडवोकेट सूरज गौतम ने बताया कि धरती आबा बिरसा मुंडा पूरे राष्ट्र के है और उनके जन्म दिवस को पूरा राष्ट्र मनाएगा, बिरसा मुंडा जयंती के रूप में जनजातीय गौरव दिवस नाम में ही साफ साफ राजनीती की बू आ रही है। कोई भी जबरदस्ती आदिवासी समाज पर जनजाति गौरव दिवास को थोप नहीं सकता है।
   जयंती समारोह में गुड्डू, भोला, मदन, चिरौजी लाल, रामजी, पप्पू भारतीय, बदन यादव, रामभवन भारतीय, अशोक गौतम, मदन, रामकली, गुलाब कली, शकुन्तला, बैजन्ती आदि लोग उपस्थित रहे।