तपोभूमि में बह रही संस्कृत की गंगा

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तपोभूमि में बह रही संस्कृत की गंगा
अवधनामा संवाददाता

सीतापुर। संस्कृत भारती अवध प्रांत द्वारा आयोजित सप्त दिवसीय संस्कृत भाषा बोधन वर्ग मेंं पहले दिन से ही प्रशिक्षुओं के मुख से संस्कृत संभाषण रूपी गंगा का प्रवाह प्रारंभ हो गया। इस वर्ग में 8 जनपदों से आए कुल 56 प्रशिक्षु सहित नैमिषारण्य के पाठशालाओं के कुछ आचार्य एवं बटुको सहित कुल 70 लोग संस्कृत संभाषण का अभ्यास कर रहे हैं। वर्ग अधिकारी एवं संस्कृत भारती के प्रांत मंत्री डॉ ओमकार नारायण दुबे ने बताया कि यह सभी विद्यार्थी इस 7 दिन के आवासीय वर्ग में चौबीसों घंटे अनवरत संस्कृत में ही बोलते हैं । संस्कृत में ही खेलकूद संस्कृत में ही भोजन आपस में संस्कृत बोलना इनकी दिनचर्या बन चुकी है। कालीपीठ के इस परिसर में किसी भी हिंदी भाषी का प्रवेश वर्जित है यहां रह रहे सभी लोग संस्कृत में ही बातचीत करते हैं। वर्षों बाद नैमिषारण्य की धरती पर  संस्कृत भाषा की मंदाकिनी कल-कल निनाद करते हुए पुनः बहने लगी है। 7 दिन के इस प्रशिक्षण में संस्कृत बोलना सीखने के साथ-साथ संस्कृत बोलना सिखाने का भी प्रशिक्षण लेकर सभी प्रशिक्षु विभिन्न क्षेत्रों में जाकर लोगों को निशुल्क संस्कृत बोलना सिखाएंगे। वर्ग के द्वितीय दिन संस्कृत संभाषण के साथ-साथ व्याकरण की भी कक्षाएं चली ।शिक्षण प्रमुख मीना कुमारी एवं सहस शिक्षण प्रमुख शालिनी दीक्षित सविता मौर्या पूजा बाजपेई , प्रांत संगठन मंत्री डॉ गौरव नायक तहसील संयोजक सर्वेश शुक्ला हरिओम शुक्ला एवं अन्य सहयोगी आचार्यों के द्वारा विविध प्रकार से संस्कृत का शिक्षण किया जा रहा है।