43 दिन बाद दर्ज हुई सरकारी सम्पत्ति लूट की रिपोर्ट, अब विवेचना भगवान भरोसे

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43 दिन बाद दर्ज हुई सरकारी सम्पत्ति लूट की रिपोर्ट, अब विवेचना भगवान भरोसे

अवधनामा संवाददाता 

बाराबंकी। 17 सितम्बर को शहर में सरकारी संपत्ति की लूट घसोट को लेकर दी गई तहरीर ने 43 दिन धूल गर्दा खाया, आखिरकार गत 30 अक्टूबर को कोतवाली में एफआईआर दर्ज हो गई पर नतीजा नौ दिन चले अढ़ाई कोस ही साबित रहा, एफआईआर तो हो गई पर विवेचना में स्पीड ब्रेकर लग गया है। इस अहम मामले को लेकर खासकर असल दोषियों पर पर्दा डालने के लिए लीपापोती में कोई कसर नही छोड़ी जा रही। देखना जरूरी होगा कि आरोपियों को बचाने के लिए क्या गुल खिलाये जाएंगे।

बताते चलें कि नागेश्वर नाथ मंदिर मार्ग पर एक किनारे आबादी बसने के पहले से स्लाटर हाउस बना हुआ है, जो नगर पालिका परिषद की संपत्ति है। प्रतिबंध के चलते यह भवन निष्प्रयोज्य हो गया। बीती 17 सितम्बर को गुरुवार देर रात 24 घण्टे की बारिश में इस भवन का जर्जर हिस्सा ढह गया। बताया जाता है कि कुछ वाहन व रिक्शा मलबे में दब गए। उन्हें निकाला जा रहा था कि अचानक भीड़ एकत्र हुए और रिक्शा, ठेला, मारूति कार, वैन, हाफ डाला आदि पर लोगबाग मलबे से ईंट, सरिया उठा कर ले जाने लगे। एकबारगी लगा कि जैसे सस्ते माल को मुफ्त में बांटा जा रहा हो। यह सिलसिला घण्टो चला, मजमा ऐसा था कि लोग देखते रह गए। मौजूद लोगो ने बार बार एक ही व्यक्ति का नाम लिया और कहा कि अमुक ने मलबा उठा ले जाने को कहा है। बहरहाल घंटो लूट होती रही। इसकी सूचना नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी व अन्य को पहुंची। तब जाकर मौके पर कुछ लोगों को भेज कर भीड़ हटवाई गई और मनमानी रुक सकी। वहीं बचा हिस्सा भी ढहा दिया गया। मौके से सफाई निरीक्षक व सफाई नायक की रिपोर्ट पर उसी की ओर से पूरे घटनाक्रम की तहरीर घटना के दूसरे दिन यानी 18 सितम्बर दिन शुक्रवार को कोतवाली में दी गई। कई दिन गुजर जाने का बाद भी एफआईआर न दर्ज होने पर इस बारे में पूंछने पर नगर कोतवाल अमर सिंह ने बताया कि शहर चौकी प्रभारी से जांच कराई जा रही। रिपोर्ट मिलते ही एफआईआर दर्ज होगी। 

बहरहाल एफआईआर कब होगी, पूंछते पूंछते सवाल भी बासी हो चला पर रिपोर्ट नही दर्ज की गई। यह हाल तब रहे जब सरकारी सम्पत्ति की लूट की गई। अंदरखाने से सूत्र बता रहे थे कि आरोपियों का दबाव बराबर बना हुआ है। बहरहाल 43 दिन धूल फाँकने के बाद गत 30 अक्टूबर को शहर कोतवाली पुलिस ने जाने किस दबाव या भय में रिपोर्ट दर्ज कर ली। इस रिपोर्ट में फिलहाल आरोपी अज्ञात हैं। हालांकि सुबूत के तौर पर घटना के दिन के कई वीडियो, बयान और लोगों द्वारा मलबे को ले जाने के प्रमाण पर्याप्त पुलिस के पास हैं। बता दें कि कोतवाल ने शहर चौकी प्रभारी को जांच सौंपने की बात कही पर करीब एक महीने तक चौकी प्रभारी की ओर से कम हीलाहवाली नही की गई। जांच का नाम पर खूब समय जाया किया गया। खैर अब जब एफआईआर हो चुकी है तो जांच भी किसी नतीजे पर पहुंचनी चाहिए लेकिन आरोपियों के रसूख, ताक़त व पहुंच के बल पर जब एफआईआर 43 दिन सफर कर सकती है तो विवेचना तो सबसे अहम हिस्सा है, उसे प्रभावित करने के लिए कौन से गुल खिलाये जाएंगे। यह पुलिस की कार्यशैली पर निर्भर करेगा। कोशिश बचाने की होगी या असल दोषियों को सामने लाने की।