संस्कृत को व्यवहार में लाएँ- ओमकार दुबे

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संस्कृत को व्यवहार में लाएँ- ओमकार दुबे

अवधनामा संवाददाता 

सीतापुर । संस्कृत भारती अवध प्रांत द्वारा कालीपीठ नैमिषारण्य में आयोजित आवासीय संस्कृत भाषा प्रबोधन वर्ग के तृतीय दिन मुख्य वक्ता के रूप में काशी से आए देश के प्रकांड विद्वान व्याकरण एवं न्याय के प्रसिद्ध मर्मज्ञ स्वामी डॉक्टर दिव्य चैतन्य जी महाराज ने प्रशिक्षुओं को संस्कृत भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन को संस्कारित बनाने के लिए संस्कृत भाषा का अध्ययन अध्ययन एवं उसका व्यवहारिक प्रयोग अति आवश्यक है। सभी भारतीयों को संस्कृत को अपने व्यवहार में लाना चाहिए वर्ग अधिकारी संस्कृत भारती के प्रांत मंत्री डॉ ओमकार नारायण भारद्वाज ने प्रशिक्षुओं को संस्कृत बोलना सिखाने का प्रशिक्षण देते हुए प्रत्यक्ष पद्धति से संस्कृत माध्यम से संस्कृत का अध्यापन करने की विधियां सिखाई विदित हो कि यह सप्त दिवसीय आवासीय भाषा प्रबोधन वर्ग संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने के ढेर से आयोजित किया गया है अतः यहां से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी प्रतिभागी शिक्षक के रूप में अवध प्रांत के विभिन्न जनपदों में जन सामान्य को निशुल्क संस्कृत बोलना सिखाएंगे प्रांत संगठन मंत्री डॉ गौरव नायक ने जीवन को अनुशासित रखने के लिए विविध उपायों को बताया शिक्षण प्रमुख मीना कुमारी एवं प्रशिक्षण प्रमुख शालिनी दीक्षित संस्कृत संभाषण की कक्षाओं को प्रत्यक्ष पद्धति से संचालन की विधियां सिखाई आदर्श शिविर शिक्षिका पूजा बाजपेई ने छात्रों को खेल खेल में संस्कृत बोलना सिखाया सविता मौर्या आचार्य सर्वेश शुक्ला आचार्य हरिओम शुक्ला विनय मोहन स्वदेश शुक्ला प्रभाकर द्विवेदी सहित सभी शिक्षक प्रशिक्षुओं को अत्यंत ही सरल ढंग से संस्कृत बोलना सिखा रहे हैं ।