कोविड का किशोरों एवं युवाओं पर पर पड़ा है गंभीर दुष्प्रभाव

मानसिक और सामाजिक सहयोग की जरूरत : डा.संजीव शर्मा

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कोविड का किशोरों एवं युवाओं पर पर पड़ा है गंभीर दुष्प्रभाव

अवधनामा संवाददाता

ललितपुर। मनोवैज्ञानिक एवं मुस्कुराएगा इंडिया काउंसलर डा.संजीव कुमार शर्मा ने बताया कि कोरोना के चलते युवाओं और किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो रही हैं। किशोर और युवाओं में शैक्षिक गतिरोधकैरियर में अवरोध के चलते मानसिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। पिछले दो साल से कहर बरपा रही कोरोना महामारी ने अभी भी पीछा नहीं छोड़ा है। इसके साथ ही कोरोना की तीसरी लहर को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि फरवरी में भारत में कोरोना की तीसरी लहर चरम पर होगी। कोरोना की दो लहरों ने सभी वर्ग के लोगों को प्रभावित किया है लेकिन किशोरों एवं युवाओं पर इसका गंभीर दुष्प्रभाव पड़ा है। हम सभी शताब्दी की सबसे बड़ी गंभीर त्रासदी का सामना कर रहे हैं। सभी के लिए यह मुश्किल समय है किशोर भी इस समस्या से अछुते नही हैं। परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाना उनके लिए भी मुश्किल हो रहा हैइसका असर उनकी नियमित दिनचर्या पर पड़ रहा हैकिशोरों में खानपान संबंधी समस्यानींद संबंधी समस्याव्यवहार संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही है। कुछ किशोरों में आक्रामकता बढ़ रही हैकुछ युवाओं मनोग्रस्तता बाध्यता के लक्षण बढ़ रहे है। कोरोनाकाल में क्योंकि उन्हें बाहर आने जाने की मनाही थी। नियमित दिनचर्या नहीं होने कारण मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताए जाने की अवधि में बढ़ोतरी हुई। स्क्रीन टाइम बढऩे से मानसिक एकाग्रता और ध्यान की कमी आदि समस्या में भी बढ़ोतरी हुई हैं। जिन लोगो ने कोविड-19 के कारण अपने किसी प्रियजन को खोया उनमें यह समस्या अधिक देखी जा रही है और ऐसी स्थिति से उपजे तनाव का मुकाबला करना अधिक मुश्किल हो जाता है। और सबसे बड़ी बात यह है कि किशोर अपनी भावनाओं को बताने में इसलिए हिचकते हैं कि कहीं कोई उनके बारे में कोई गलत राय न बना लें या अपना निर्णय न थोप दे। डा.शर्मा ने आगे बताया कि किशोर के व्यवहार से अकसर इस बात का पता लगाना मुश्किल होता है कि उस में तनाव की स्थिति कितनी गंभीर है या फिर यह उसका किशोरावस्था के बदलाव का व्यवहार है। कुछ विशेष तरह के लक्षणों से किशोरों के तनाव की पहचान की जा सकती हैजैसे कि चिड़चिड़ापनअकारण क्रोध करनाआक्रामक और अचानक हिंसक हो जानापरिवार एवं समाज से अपने आपको अलग करनासोच में नकारात्मकता आ जानाकिसी भी शौक या साज सज्जा में रूचि नही लेनाअनियमित दिनचर्या का होनाबहुत अधिक खाना या बिल्कुल भी नहीं खानाया तो नींद का कम आना या बहुत अधिक सोना। खुद को शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाने की कोशिश करना और अधिक गंभीर स्थिति में आत्महत्या का प्रयास करना आदि। परिजनों एवं मित्रों को किशोर में इस तरह के किसी भी व्यवहार पर विशेष रूप से ध्यान रखना होगा। यदि इस तरह का व्यवहार लंबे समय तक हों तो किसी मनोवैज्ञानिकमनोचिकित्सक एवं डॉक्टर से परामर्श अवश्य लेना चाहिए। राष्ट्रीय सेवा योजना उत्तर प्रदेशयूनिसेफ एवं पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में डा.अंशुमालि शर्मा के निर्देशन में संचालित मुस्कुराएगा इंडिया के प्रशिक्षित काउंसलर से भी निशुल्क परामर्श सेवा प्राप्त हो सकती है। अभिभावकों को यह समझना होगा कि किशोर एवं युवा सबसे अधिक मुश्किल दौर से गुजर रहे हैंउन्हें मानसिक एवं सामाजिक सहयोग की जरूरत है।