शोषित, पीड़ित, वंचितों की आवाज थे कर्पूरी ठाकुर : रघु ठाकुर

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शोषित, पीड़ित, वंचितों  की  आवाज थे  कर्पूरी ठाकुर : रघु ठाकुर 
अवधनामा संवाददाता 

ललितपुर। जननायक कर्पूरी ठाकुर के जीवन चरित्र  को जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से जनवरी एवं फरवरी माह के प्रत्येक रविवार को सुबह 10 बजे ऑनलाइन ज़ूम एप के माध्यम से विचार गोष्ठियों का संयोजक आर्य रत्न शिक्षक लखन लाल आर्य के द्वारा आयोजन किया जा रहा हैं। जिसमें आज भारतीय राजनीति में कर्पूरी ठाकुर का योगदान विषय पर प्रख्यात समाजवादी चिंतक रघु ठाकुर राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के मुख्य आतिथ्य एवं प्रोफेसर डॉ प्रमोद कुमार शर्मा की अध्यक्षता एवं रेलवे अधिकारी मुकेश चंद्रा दिल्ली, सुरेंद्र कुमार बदलिया राष्ट्रीय अध्यक्ष सेन सविता समाज दिल्ली(राष्ट्रीय सदस्य बीजेपी पिछड़ा वर्ग मौर्चा),देशभक्त बाबा भानु प्रताप भारतीय लखनऊ,के विशिष्ठ आतिथ्य एवं संयोजक आर्य रत्न शिक्षक लखन लाल आर्य के संचालन में सम्पन्न हुई।

मुख्य अतिथि प्रख्यात समाजवादी चिंतक रघु ठाकुर ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर का भारतीय राजनीति में योगदान अनेक अर्थों में है प्रथम तो यह कि व्यक्ति को हर समय अपनी आजादी,मुक्ति व समता के लिए संघर्षरत रहना चाहिए। कर्पूरी जी आजादी के आंदोलन में जेल गए समाजवादी आंदोलन व  आपातकाल में भी जेल  यह अनुकरणीय उदारण है। दूसरे उन्होंने समाज  के सबसे कमजोर इंसान को यह आत्म-विश्वास  दिया कि गरीब व्यक्ति भी राजनीति के  सत्ता के शीर्ष पर जा सकता है बशर्ते वह दृढ़ता के साथ, सिंद्धान्त के रास्ते पर चलता रहें।

कर्पूरी जी स्वत्:  ही अत्यंत पिछड़े वर्ग की जाति से थे जो संख्या बल धनबल व बाहुबल में बहुत ही कमजोर थे।परंतु उन्होंने डॉ रामनोहर लोहिया के विचार को आत्मसात कर समता के संकल्प को लेकर जो संघर्ष किया, वह  बिहार की  जाति के नही परन्तु सम्पूर्ण बिहार के नेता हो गए। उन्होंने   स्वत्: स्वीकार किया था कि मेरी भूमि पर जो विजय पाई है वह डॉ  लोहिया की देन है अगर  लोहिया न होते तो मुझे इस मंजिल पर कौन पहुंचाता,कर्पूरी जी की यह नैतिक ईमानदारी थी कि उन्होंने यह स्वीकार किया। 

कर्पूरी जी का दूसरा योगदान यह है कि उन्होंने ईमानदारी व बिना पैसे केराजनीति की जा सकती है यह सिद्ध किया । आज के इस राजनैतिक वातावरण में जब जातियों के नेता पैसे व पद के लिए अपनी जातियों का मोलभाव करते है तव कर्पूरी जी एक आदर्श के रूप में साबित होते है। जो जातिवाद परिवारवाद व पूंजीवाद तीनो को नकार कर गरीब व आम आदमी के सहयोग से राजनीति का कार्य कराते हैं। कर्पूरी जी का संघर्ष अहिंसिक व लोकतांत्रिक था उन्होंने हिंसा का मार्ग नही चुना ओर यही कारण था कि कर्पूरी ठाकुर के कार्यकाल में हिसा को कोई स्थान नही मिला यानी अहिंसिक आंदोलनों के वे आदर्श प्रयोग कर्ता थे।

कर्पूरी जी ने राजनेताओं को अध्ययन करना सिखाया था और तर्क व  ज्ञान का प्रयोग सिखाया ।आमजन के  दुःख दर्द को समझने के लिए आम आदमी व गरीब के समान जीने का मार्ग बताया। अध्यक्षता करते हुए  प्रोफेसर डॉ प्रमोद कुमार शर्मा प्रयागराज ने कहा कि सामाजिक धुर्वीकरण के पक्षधर थे कर्पूरी ठाकुर और उन्होंने इस दिशा में कार्य किया।विशिष्ठ अतिथि राजेन्द्र कुमार बदलिया दिल्ली ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर जाति के नही जमात के नेता थे।

देशभक्त बाबा भानु भारतीय लखनऊ ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर  सामाजिक न्याय के सूत्रधार थे । रेलवे अधिकारी मुकेश चंद्रा दिल्ली ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर का मानना था कि जिस समाज का अधिकतम समुदाय सत्ता से उदासीन होता हैं वह मुल्क कमजोर और गुलाम होता है। इसलिए  वह उपेक्षित और शोषित वर्गों को विशेष अवसर के सिंद्धान्त को प्रतिपादित करने के पक्षधर थे।

संचालन करते हुए आर्य रत्न  शिक्षक लखन लाल आर्य ने कहा कि कर्पूरी  ठाकुर  दलितों पिछड़ों के मसीहा थे।

संचालन आर्य रत्न शिक्षक लखन लाल आर्य एवं आभार रामकुमार सेन अजान ने जताया।