संस्कृत भाषा एवं साहित्य में भारतीय संस्कृति एवं धरोहर संरक्षित

नेहरू महाविद्यालय में विद्वत गोष्ठी सम्पन्न

 | 
नेहरू महाविद्यालय में विद्वत गोष्ठी सम्पन्न

अवधनामा संवाददाता

ललितपुर। विश्व विरासत सप्ताह के छठवें दिन उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग झांसी इण्टैक ललितपुर एवं झांसी चौप्टर के तत्वावधान में नेहरू महाविद्यालय के तुलसी सभागार में देश की प्राचीन संस्कृति के उन्नयन एवं धरोहर के संरक्षण में संस्कृत भाषा का योगदान विषय पर विद्वत गोष्ठी का आयोजन प्राचार्य डा.अवधेश अग्रवाल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। विद्वत गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए प्राचार्य डा.अवधेश अग्रवाल ने कहा कि संस्कृत भाषा विश्व की प्राचीनतम एवं समृद्ध भाषा है। इस भाषा में भारतीय संस्कृति के जीवन मूल्य, संस्कृति, आचार, विचार, व्यवहार तथा जीवन पद्धति समाहित है। देश की प्राचीन संस्कृति के उन्नयन एवं धरोहरों के संरक्षण में संस्कृत भाषा का महत्वपूर्ण योगदान है। नेमवि के संस्कृत विभागाध्यक्ष डा.ओमप्रकाश शास्त्री ने कहा कि भारत देश के ऋषियों महर्षियों ने विश्वव की प्राचीनतमसंस्कृत भाषा में वेदों, पुराणों, शास्त्रों, उपनिषदों का समग्र मानव जाति के कल्याण हेतु सृजन किया है। न केवल भारतीय संस्कृति संरक्षित हैसर्वेभवन्तु सुखिनवसुधैव कुटुम्बकम यो वैभूमा तत्सुखम का इस भाषा ने दुनिया को संदेश देकर सम्पूर्ण मानव जाति का कल्याण मार्ग प्रशस्त किया है। इन्टैक ललितपुर चौप्टर के संयोजक सन्तोष कुमार शर्मा ने कहा कि संस्कृत भाषा एवं साहित्य में वर्णित ज्ञान के अमूल्य धरोहर, नैतिक मूल्यों ने लाखों वर्षों से भारत देश को जगदगुरू के पद पर प्रतिष्ठित किया है। आज आवश्यकता है कि हम संस्कृत भाषा में निबद्ध समृद्ध ज्ञान परम्परा से युवा पीढ़ी को परिचित कराकर संस्कारों एवं प्राचीन धरोहरों की रक्षा करें। वरिष्ठ पत्रकार मनोज पुरोहित ने प्रस्तुत विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा की धमनियों में भारत देश की अस्मिता, जीवन मूल्य, संस्कृति, सभ्यता एवं वैश्विक विचार तथा धरोहर संरक्षित है। इस अवसर पर डा.हरीशचंद्र दीक्षित, डा.रामकुमार रिछारिया, डा.संजीव शर्मा, डा.सूबेदार यादव, डा.सुधाकर उपाध्याय, डा.प्रीति सिरौठिया, डा.वर्षा साहू, डा.रिचाराज सक्सेना, श्वेता आनन्द, फहीम बख्श, हरीप्रसाद, अंकित चौबे, सुरेश, कमलेश प्रजापति, लक्ष्मीनारायण सोनी आदि उपस्थित रहे।