निजीकरण के विरोध में बैंकों पर दूसरे दिन भी लटके रहे ताले

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निजीकरण के विरोध में बैंकों पर दूसरे दिन भी लटके रहे ताले

अवधनामा संवाददाता 

सहारनपुर। निजीकरण के विरोध में आज बैंकों में दूसरे दिन भी ताले लटके रहे। बैंक बंद होने के कारण लगभग साढ़े सात सौ करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ। बैंक कर्मियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगे न मानी गयी, तो वह अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को विवश होंगे।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के आह्वान पर आज बैंक कर्मचारियों ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा कोर्ट रोड पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के संयोजक संजय शर्मा ने बताया कि देश के लगभग 10 लाख बैंक कर्मचारी आंदोलनरत है, क्योंकि सरकार सरकारी बैंकों का निजीकरण करना चाहती है। यह निश्चित है कि निजीकरण न तो दक्षता लाता है और न ही सुरक्षा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वह अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को विवश होंगे। यूपी बैंक इम्पलाइज यूनियन के सचिव प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक राष्ट्र के निर्माता है, उनके पास सम्पत्तियों का अकूत भंडार है। सरकार इन सभी निजी व्यवसायिक घरानो के हाथों में सौंपना चाहती है। राजीव कुमार जैन ने बताया कि ज सरकार ने फरवरी 2021 में बजट में घोषणा की कि दो सार्वजनिक बैंको का निजीकरण किया जायेगा, तो पूरे बैकिंग कर्मचारियों एवं अधिकारियांे ने 15-16 मार्च 2021 को दो दिवसीय हड़ताल के माध्यम से अपना व्यापक विरोध व्यक्त किया था। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करने वालो में अमित, शांति स्वरूप अरोड़ा, चन्द्रमोहन, रोहित काम्बोज, राजेश कुमार अरोड़ा, सुरेश कुमार, इन्द्रपाल, विनय जैन, मुकेश कुमार, राकेश कुमार, अश्वनी, रामकुमार, अमित बोध, आशीष कुमार, गौरव, प्रदीप, संतोष शर्मा, सोहन सिंह, अतुल सिंघल, राजकुमार शर्मा, श्वेता, ज्योति, चित्रा, पायल, दिव्या, आंचल, पूजा, सिमरन कौर, गरिमा, संध्या, गुरमीत कौर आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।