दारुल उलूम में मजहबी तालीम संग पढ़ाई जा रही हिन्दी

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हिन्दी दिवस : दारुल उलूम में मजहबी तालीम संग पढ़ाई जा रही हिन्दी

अवधनामा संवाददाता 

एच एफ़ ख़ान देवबंद : देश हिंदी दिवस मना रहा है। देश के सभी सरकारी और गैर सरकारी एवं अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में हिन्दी पढ़ाया जाता है। कम लोग जानते होंगे कि दारुल उलूम भी अपने मजहबी तालीम के साथ हिंदी की तालीम भी दे रहा है। इसके अलावा अन्य मदरसों में भी उर्दू के साथ ही हिन्दी की शिक्षा दी जाती है।इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम बीते कई सालों से ही तलबा (छात्रों) को हिंदी की तालीम दे रहा है। छात्रों को हिंदी की तालीम शुरूआती कक्षाओं तक दी जाती है, लेकिन दारुल उलूम देश की पहली भाषा हिंदी में भी अपनी तलबा को पारंगत करता है। विश्व विख्यात संस्था दारुल उलूम, वक्फ दारुल उलूम के अलावा मदरसा जामिया इमाम मोहम्मद अनवर शाह, दारुल उलूम जकारिया एवं मदरसा जामिया तुश-शेख अल हुसैन मदनी में भी तलबा मजहबी तालीम के साथ हिंदी विषय की तालीम हासिल करते हैं। दारुल उलूम मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने बताया कि संस्था में हिन्दी कक्षा पांच तक पढ़ाई जाती है।

हिन्दू बच्चे भी लेते थे तामील

वर्ष 1960 तक संस्था की आरंभिक कक्षाओं में क्षेत्र के हिन्दू समाज के बच्चें भी तालीम हासिल करने के लिए आते थे। मुंशी नवल किशोर और राव उमराव सहित कई लोगों ने दारुल उलूम के पुस्ताकालय को बड़ी संख्या में किताबें दी थीं। दारुल उलूम मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने बताया कि पहले स्कूलों की संख्या कम होने के चलते लोग अपने बच्चों की तरबियत के लिए उन्हें दारुल उलूम भेजा करते थे।