हवाओं की खिलाफत झेल समाजवाद का झंडा बुलंद करते आये हैं हाजी फरीद

आमजन में लोकप्रियता हो या पार्टी के प्रति समर्पण, फरीद हमेशा खरे उतरे 

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हवाओं की खिलाफत झेल समाजवाद का झंडा बुलंद करते आये हैं हाजी फरीद
अवधनामा संवाददाता 

बाराबंकी। बात लोकप्रियता की हो और बाराबंकी की माटी में जन्मे समाजवाद का झंडा बुलंद करने वाले और पार्टी के वरिष्ठ नेता में शुमार किए जाने वाले हाजी फरीद महफूज किदवई का नाम ना आवे, ऐसा नहीं हो सकता। कितने ही बार सदन का रास्ता तय करके आए हाजी फरीद मंत्री भी रहे और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिनती कराते हुए समय-समय पर मार्गदर्शन करते रहे। उनका व्यक्तित्व, सबसे मेलजोल, सबको साथ लेकर चलने की आदत और सहयोगी स्वभाव ही उन्हें अन्य नेताओं से अलग खड़ा करता है। कार्यकर्ताओं की मुसीबत हो या खुशी का मौका, वह शामिल होना नहीं भूलते। हिंदू हो या मुसलमान हर कोई जो भी उनसे जुड़ा है। वह उन्हें तहे दिल से पसंद करता है। उन्होंने भी कार्यकर्ता हो या जनता, उसका हित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। 

आज हाजी फरीद महफूज किदवई कुर्सी क्षेत्र को अपना आशियाना बनाए हुए हैं। गांव गांव घूम कर वह लोगों से मिल रहे और हालचाल ले रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं कि यह सब चुनावी तैयारियों का हिस्सा भी है लेकिन लोगों से मिलना जुलना उनकी आदत में शुमार रहा है। वह चाहे चुनाव हो या फिर आम दिन। यही हाल उनसे मिलने वालों का भी है, मोबाइल पर या फिर मिलकर नेता का हाल-चाल जानने के लिए लोग परेशान रहते हैं। यह है नेता फरीद महफूज का व्यक्तित्व, वह राजनीति में तो हैं पर वह वर्तमान राजनीति के रंग में रंगे हुए नहीं। उनको यह बात हमेशा याद रहती है कि लौट कर जाना जनता के बीच में ही पड़ता है और फिर जब जनता ही चुन कर विधानसभा लोकसभा जैसे सदन में भेजती है तो फिर उस से बढ़कर कौन। फिलवक्त हाजी फरीद अपने कार्यकर्ताओं मिलने वालों के साथ क्षेत्र का भ्रमण कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी झंडा एक अरसे से बुलंद करते आए हाजी फरीद अपने प्रतिद्वंदी को कड़ी टक्कर बल्कि नाकों चने चबवाने की कूवत रखते हैं, उनका जलवा समय-समय पर लोगों ने देखा है। कुर्सी क्षेत्र का समीकरण ही कुछ ऐसा है कि उनसे बेहतर उम्मीदवार कोई हो ही नही सकता। यहां कुछ बातें याद दिलाना जरूरी हो जाता है कि हाजी फरीद समाजवादी पार्टी के उन नेताओं में गिनती रखते हैं जो नींव के समय, बल्कि पार्टी की पैदाइश के समय से साथ हैं। हाजी फरीद ने कभी भी पाला बदलने या फिर मन बदलने की कोशिश नहीं की। मनमुटाव भले हुए पर पार्टी के समर्पित सिपाही के रूप में वह हमेशा खड़े नजर आए। चाहे पार्टी सत्ता में रही हो या फिर संघर्ष का समय रहा हो उन्होंने अधिकतर सभी नेताओं से मेलजोल बनाकर चलने की कोशिश की। यही कुछ वजह है कि उनकी गिनती पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान के बाद लोकप्रिय मुस्लिम नेताओं में की जाती रही है। मंत्री पद उन्हें दिया गया तो उन्होंने खुशी से स्वीकार कर लिया, जबकि जिले में ही मंत्री पद के लिए हुआ ड्रामा किसी से छिपा नहीं है। हाजी फरीद ने एक मंत्री के तौर पर बेहतरीन कार्यकाल दिया व आमजन की कसौटी पर खरे उतरे। भूल संभावित है, कमियां स्वभाव है पर हाजी फरीद इन सब से ऊपर उठकर रहे। उन्होंने अपनी कोई विशेष छवि नहीं बनने दी जिससे जनता कार्यकर्ता और उनके बीच का संपर्क संबंध प्रभावित हो सके। छवि का फायदा उन्हें समय-समय पर मिलता रहा। जनता ने उन्हें सर आंखों पर बिठाया और लोकप्रिय नेता की पहचान बना दी। यह पहचान इस नेता ने कभी खोने नहीं दी, चाहे विधानसभा क्षेत्र मसौली हो, रामनगर हो या फिर मौजूदा स्थिति में विधानसभा क्षेत्र कुर्सी। एक अलग छाप छोड़ने में उनका कोई सानी नहीं। कार्यकर्ताओं की भी परम इच्छा है कि समाजवादी पार्टी इस विधानसभा क्षेत्र से हाजी फरीद महफूज किदवई को बतौर प्रत्याशी पेश करें तो पार्टी की राह आसान हो जाएगी।

एक चुनाव पूर्व नवगठित विधानसभा पर फिलहाल भाजपा का कब्जा है, तो यह कब्जा लहर की ही देन है। साफ मतलब है कि समाजवादी पार्टी की इस क्षेत्र में उपस्थिति जमीन से जुड़ी हुई है। इस सीट से भी तमाम दावेदार नेतृत्व की ओर टकटकी लगाए पंक्तिबद्ध है। फैसला किस नाम पर होगा, यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा लेकिन समाजवादी पार्टी बाराबंकी की नींव का पत्थर माने जाने वाले पार्टी के संघर्ष के समय कदम दर कदम साथ रहने वाले वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री हाजी फरीद महफूज किदवई से मजबूत प्रत्याशी व नेता शायद ही ढूंढने को मिले। चर्चा है कि पार्टी से टिकट पाने के लिए रसूखदारों व धनाढ्य नामों को आगे किया जा रहा, लेकिन बात अगर दमदार उम्मीदवार की होगी। तो हाजी फरीद इन सब में सबसे आगे खड़े नजर आएंगे। यह अलग बात है कि पार्टी नेतृत्व क्या रुख अपनाता है। याद दिलाना जरूरी होगा कि विपरीत परिस्थितियों में भी फरीद महफूज ने समाजवादी पार्टी का झंडा बुलंद रखने में कामयाबी हासिल की। लोकप्रियता की बात की जाए तो फिलहाल इस पायदान पर वह सबसे आगे खड़े हैं। अब पार्टी को प्रतिष्ठा चाहिए, सीट चाहिए या फिर सिर्फ चुनाव लड़ कर शांत बैठ जाने वाला व्यक्ति, यह वही तय करेंगे।

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