राज्यपाल ने जिला कारागार का किया निरीक्षण, बांटी सामग्री

टी.बी. रोग उन्मूलन की बैठक में किया प्रतिभाग

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राज्यपाल ने जिला कारागार का किया निरीक्षण, बांटी सामग्री
अवधनामा संवाददाता

ललितपुर। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल द्वारा अपने भ्रमण कार्यक्रम के दौरान जिला कारागार का निरीक्षण किया, तत्पश्चात पुलिस लाइन सभागार में टी.बी./रोग उन्मूलन पर केन्द्रित बैठक की अध्यक्षता की। जिला कारागार के निरीक्षण के दौरान राज्यपाल ने कारागार में निरुद्ध महिला बंदियों से वार्ता की तथा उनकी समस्याओं को सुना। मौके पर उन्होंने महिला बंदियों को उनके दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं का वितरण किया, जिनमें 4800 रु0 के 24 कम्बल, 4800 की लागत से 24 लेडीज सॉल, 6000 की लागत की 24 साड़ी, 15 हजार की लागत का म्यूजिक सिस्टम, 29740 लागत का हेवल्स गीजर, 3000 के महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों के लिए कपड़े, 40 हजार की लागत से महिला बैरक हेतु आर0ओ0, 34545 की लागत का वॉटर कूलर एवं 18390 की लागत की सैमसंग वॉशिंग मशीन शामिल है। इस प्रकार कुल 156275 रु0 की लागत का सामान महिला बंदियों के लिए वितरित किया गया। इसके उपरान्त उन्होंने पुलिस लाइन सभागार में आयोजित टी0बी/रोग उन्मूलन की बैठक में प्रतिभाग किया। बैठक में जिला क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ0 जे0एस0 बक्शी ने प्रजेन्टेशन के माध्यम से टीबी उन्मूलन के सम्बंध में विस्तृत जानकारी दी। बैठक में राज्यपाल ने कहा कि ग्राम प्रधानों को इस अभियान में जोडऩा आवश्यक है। ग्राम प्रधान यदि ध्यान दें तो ग्राम टीबी मुक्त हो सकता है। टीबी मरीजों को सरकारी सहायता के रुप में 500 रुपए दिये जाते हैं, तो यदि टीबी मरीजों के घर जायें तो उनसे यह अवश्य पूछें कि उन्हें यह सहायता प्राप्त हो रही है या नहीं। उन्होंने कहा कि जनपद में सभी क्लास-1 अधिकारी कम से कम एक टीबी मरीज को अवश्य गोद लें। हम सबसे पहले शुरुआत करेंगे तो टीबी रोग को 2025 तक अवश्य खत्म कर लेंगे। उन्होंने पुलिस के अधिकारियों से कहा कि वे टीबी रोगी बच्चों को अवश्य गोद लें, यदि पुलिस विभाग इस कार्य में आगे आएगा तो समाज में इसका अच्छा प्रभाव पड़ेगा और जब पुलिस विभाग के लोग टीबी मरीजों के बच्चों से बार-बार मिलने जायेगें तो आसपास के परिवेश में एक परिवार का भाव पैदा होगा। उन्होंने कहा कि विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को भी इस कार्य में जोड़ा जाये। विद्यालय का काम सिर्फ बच्चों को पढ़ाना नहीं है, बल्कि उनके स्वास्थ्य की भी चिंता करनी है। आपलोग आंगनबाड़ी केन्द्रों पर जाकर बच्चों को योग, संगीत आदि के माध्यम से अच्छे संस्कारों की ओर प्रेरित करें।