कंपाउंडर के भरोसे चल रहा राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय

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कंपाउंडर के भरोसे चल रहा राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय

अवधनामा संवाददाता 

ललितपुर (Lalitpur)। नेहरू नगर स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय सप्ताह में पांच दिन डॉक्टर के बिना बीमार चल रहा है। यहां इलाज कराने आए मरीजों को डॉक्टर के दर्शन दुर्लभ होते हैं। रोगियों की सहायता व उपचार यहां भगवान भरोसे है। स्थानीय निवासी व मरीजों का कहना है कि डॉक्टर सप्ताह में बुधवार व शनिवार दो दिन मरीजों का इलाज करते है। अन्य दिनों कंपाउंडर के भरोसे अस्पताल चल रही है।

नगर के मोहल्ला नेहरू नगर वार्ड नंबर एक सिद्दनपुरा स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में मोहल्लेवासी के साथ-साथ आस-पास व नजदीकी ग्रामीणों के बीमार लोग आयुर्वेदिक अस्पताल में इस उम्मीद के साथ पहुंचते हैं कि शायद धरती पर भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर साहब उन्हें ठीक कर देंमगर मरीज राजकीय आयुर्वेदिक  अस्पताल में डॉक्टर न मिलने से निराश होकर लौटने को मजबूर हैं। लोग अपना और अपने परिजनों का इलाज कराने अन्य प्राइवेट अस्पताल की ओर भाग रहे हैं। आयुर्वेदिक अस्पताल में  चिकित्सक समेत पांच पद सृजित किए गए हैं जिसके सापेक्ष एक फार्मासिस्ट समेत तीन कर्मचारियों की तैनाती व डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण अस्पताल बीमारी से कराह रहा है। इस अस्पताल में एक फार्मासिस्ट के सहारे व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं। जिसदिन डॉक्टर की उपस्थित होती है उस दिन आधा सैकड़ा के आसपास मरीज इलाज को आते थेलेकिन डॉक्टर अनुपस्थिति के चलते एक दर्जन भी मरीज नहीं आते और अस्पताल खुद बीमारी की मार झेलने लगता है। डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। अस्पताल की बदहाली के कारण यहां आने वाले मरीज कथित डॉक्टरों के पास जाने को मजबूर हैं।

चिकित्सक की अनुपस्थिति से चिकित्सा पद्धति का दायरा बढऩे के बजाय लगा घटने

नेहरू नगर में स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय का बुरा हाल है। सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति का दायरा बढऩे के बजाय घटने लगा हैया यूं कहे कि आयुवेर्दिक चिकित्सा घर की रसोई तक ही सिमट कर रह गई है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। डॉक्टर की अनुउपस्थिति के कारण लोग सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति से लोगों का विश्वास उठने लगा है।

अस्पताल खुलने व बंद होने का नहीं है समय निर्धारित

नेहरू नगर के मोहल्ला सिद्दनपुरा स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल के खुलने व बन्द होने का समय निर्धारित न होने के कारण मरीज उपचार के लिये बड़ी उम्मीद से अस्पताल पहुँचते हैलेकिन अस्पताल बन्द देखकर निराश होकर बिना उपचार के अन्य प्राइवेट अस्पताल में चले जाते है। जब कि शासन द्वारा आयुर्वेदिक अस्पताल खुलने का समय सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित है। जबकि नेहरू नगर स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल सुबह नौ बजे के बाद खुलती है और दोपहर ढेर बजे बंद हो जाती है। वर्तमान में आयुर्वेद को सरकार बढ़ावा दे रही हैलेकिन नेहरू नगर के आयुर्वेदिक अस्पताल की कहानी इससे कुछ उलट हैआयुर्वेद अस्पताल में सप्ताह में केवल दो दिन ही डॉक्टर उपस्थित होने से आयुर्वेद पर विश्वास करने वाले मरीजों को निराश होकर लौटने को मजबूर होना पड़ता है।