कांटा रहित नागफनी पर कृषक -वैज्ञानिक परिचर्चा का हुआ आयोजन

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कांटा रहित नागफनी पर कृषक -वैज्ञानिक परिचर्चा का हुआ आयोजन

अवधनामा संवाददाता 

झाँसी। भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद्-भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसन्धान संस्थान झाँसी द्वारा संस्थान निदेशक के मार्गदर्शन में इकार्डा परियोजना के अंतर्गत भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसन्धान संस्थान झाँसी उत्तर प्रदेश और कृषि विज्ञान केंद्र दतिया मध्य प्रदेश के तत्वाधान में कांटा रहित नागफनी पर कृषक- वैज्ञानिक परिचर्चा का आयोजन उन्नाव बालाजी दतिया में विभागाध्यक्ष फसल उत्पादन विभाग एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ सुनील तिवारीभारतीय चरागाह एवं चारा अनुसन्धान संस्थान की अध्यक्षता में किया गया । इस अवसर डॉ सुनील तिवारी जी ने गैर परम्परागत चारे के रूप में कांटा रहित नागफनी पर चर्चा करते हुए बताया कि परती व ख़राब पड़ी जमीनों या खेत के चारो तरफ बाड़ों के रूप में कांटा रहित नागफनी की खेती की जा सकती है और साथ ही साथ नागफनी के पत्ते (क्लैडोड) की पोषक गुणवत्तापौधे के प्रकार (प्रजातियों एवं किस्मों)क्लैडोड की अवस्थामौसम और कृषि सम्बन्धी स्थितियों के बारे चर्चा की गयी। । इस परिचर्चा में बुंदेलखंड क्षेत्र से उन्नाव बालाजी गांव के 60 किसानों ने भाग लिया एवं किसानों ने कांटा रहित नागफनी को चारे के रूप में बहुत महत्त्वपूर्ण मानते हुए अपने खेतों तथा उबड़ खाबड़ जमीनों में लगाने के लिए संस्थान से रोपण के लिए क्लैडोड की मांग की । इसके साथ ही सभी किसानों को नागफनी क्लैडोड व संकर नैपियर की जड़ें प्रदान की गयीं । भविष्य में भी किसान अधिक रोपण सामाग्री के लिए इच्छुक दिखे ताकि पशुओं को गर्मी में हरे चारे की व्यवस्था की जा सके। चारे की कमी की समस्या के निराकरण के लिए कांटा रहित नागफनी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इस परिचर्चा में डॉ रुपेश जैनप्रशांत कुमारप्रेम नारायन अहिरवारमनु पटेलअनुराग पटेरिया  ने भी किसानों को विभिन्न जानकारियां दी । कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रशान्त कुमार ने किया।