विद्युत विभाग बना भ्रष्टाचारियों का अड्डा

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विद्युत विभाग बना भ्रष्टाचारियों का अड्डा

अवधनामा संवाददाता (सुधीर पाण्डेय)

देवरिया पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के देवरिया शाखा में 3 वर्ष पूर्व में विभागीय अधिकारियों फिल्ड कार्य हेतु चार पहिया वाहनों का निविदा निविदा की गई निवेदन करता द्वारा संवेदक द्वारा समय समय अनुसार विभागीय पटल पर निविदा लोड कर दी गई जिसे विभाग द्वारा संस्तुति दे दी गई।
भारत सरकार या प्रदेश सरकार द्वारा निविदा सूचना में उल्लेखित किया जाता है विभाग को किस प्रकार के रजिस्ट्री कृत चार पहिया वाहन चाहिए उसके साथ निविदा कार को निम्न कागजात प्रस्तुत करने होंगे इसके ठीक उल्टा विभाग द्वारा निविदा की शर्तों का उल्लंघन करते हुए संवेदक को निविदा मंजूर कर दी गई।
सरकारी विभागों में चार पहिया वाहनों या बड़े वाहनों भार वाहनों की निविदा में स्पष्ट उल्लेखित किया जाता है की वाहन का व्यवसायिक रजिस्ट्रेशन संभागीय परिवहन विभाग द्वारा होना चाहिए जबकि जनपद के विद्युत विभाग में जिम्मेदार पदों पर बैठे भ्रष्ट अधिकारियों ने ठेकेदार से मोटी रकम वसूल कर वाहनों के बिना व्यवसायिक रजिस्ट्रेशन के ही विभागीय कार्य में लगा दिया।
विद्युत विभाग में भ्रष्टाचार की हद तो तब हो गई जब निविदा के अनुसार संवेदक को 18 गाड़ियों का भुगतान किया जाने लगा जबकि जनपद में विभाग के अधीन मात्र 7 गाड़ियां ही चलती है।
विभाग में अधीक्षण अभियंता से लेकर अधिशासी अभियंता तथा विभाग के वित्तीय जिम्मेदारों ने भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा को पार करते हुए संवेदक द्वारा संविदा के अंतर्गत बिना व्यवसायिक रजिस्ट्रेशन के ही वाहनों का प्रति माह का भुगतान किया जाता रहा है जो कि निविदा शर्तों का खुला उल्लंघन है।इस संबंध में पूछे जाने पर अधिशासी अभियंता रामसेवक ने कहा कि यह हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है,मैं जिस वाहन का प्रयोग करता हूं कुछ दिनों पूर्व में उसका व्यावसायिक पंजीकरण हो चुका है।
प्रकरण के संबंध में पूछे जाने पर अधिक्षण अभियंता जी सी यादव ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया के तहत ही संवेदक से वाहन लिए गए हैं, निविदा सूचना की शर्तों का संज्ञान नहीं है। वाहनों के कामर्शियल रजिस्ट्रेशन की जानकारी नहीं है, एक आर टी आई कार्यकर्ता द्वारा सूचना मांग जाने पर जिले के संभागीय परिवहन अधिकारी को विभागीय पत्र लिखा गया था। यह परिवहन विभाग का काम है कि वह वाहन का किस प्रकार का रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं। वहीं बिना व्यवसायिक रजिस्ट्रेशन के विभाग द्वारा वाहन सप्लाई करने वाले संवेदक को हो रहे अनवरत भुगतान के मामले में चुप्पी साध गए।
हिंदी दैनिक समाचार पत्र अवधनामा जबअधिक्षण अभियंता से पूछा गया कि क्या विभाग द्वारा निविदा के अंतर्गत ठेकेदार से ली गई 18 वाहन किन किन जिम्मेदारों द्वारा प्रयोग किया जाता है, के सवाल पर अधिक्षण अभियंता ने अनभिज्ञता जताई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पड़ोसी जनपद में भ्रष्टाचार सातवें आसमान पर है जहां विद्युत विभाग में एक का एक सौ ग्यारह भुगतान किया जा रहा है, और जिम्मेदार कहते हैं पता नहीं है आखिर किस आधार पर निविदा की शर्तों का उलंघन करते हुए कागजों में दौड़ रही 18 चार पहिया वाहनों का भुगतान किया जा रहा है।
विद्युत विभाग द्वारा तो खुल्लम खुल्ला धन उगाही किया ही जा रहा है, साथ में  विभाग के कागजों में दौड़ रही 18 चार पहिया वाहनों के कामर्शियल रजिस्ट्रेशन के परिवहन विभाग के राजस्व की भी लूट की जा रही है।