प्रशासनिक उदासीनता से फिर जहरीली हुई हिरण्ड्यवती, मरे जलीय जीव

प्रशासन की उदासीनता से मछली मारने के लिए नदी में जहर डालने की नहीं रुक रही प्रवृति

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प्रशासनिक उदासीनता से फिर जहरीली हुई हिरण्ड्यवती, मरे जलीय जीव

अवधनामा संवाददाता 

कुशीनगर। बौद्धों की पवित्र गंगा हिरण्ड्यवती नदी एक बार फिर जहरीली हो गई है। जिससे नदी में रहने वाली मछलियों सहित अन्य जीव जंतु मरकर पानी के ऊपर व किनारे तैर रहे है। प्रशासन की उदासीनता से कुछ अराजकतत्वों द्वारा मछली पकड़ने के लिए जहर डालने की प्रवृति नहीं रुक रही है। चर्चा है कि दूसरी बार बीते दिनों मछली पकड़ने व उसका व्यवसाय करने वालों द्वारा नदी में जहर डाल दिया गया। जिससे मछलियों के मर जाने व पानी मे तैरते हुए देख नदी में उतरकर मछली पकड़ने वाले ग्रामीणों की होड़ लग गई। 

काविलेगौर हो कि तथागत की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर से होकर बहने वाली हिरण्ड्यवती नदी के उद्धार को लेकर स्थानीय प्रशासन द्वारा तमाम तरह की योजनाएं शुरू की है, ताकि बौद्धों की पवित्र गंगा को निर्मल और स्वच्छ बनाया जा सके। समाजसेवी व बौद्ध भिक्षुओं द्वारा धार्मिक पर्व के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर जागरूकता फैलाने का कार्य किया जाता है। इसी क्रम में बीते 19 नवम्बर को कार्यक्रम आयोजित कर हिरण्यवती के तट पर देव दीपावली मनाई जा रही थी, तो दूसरी ओर लोग इस नदी में मरी हुई मछलियां पकड़ रहे थे। स्थानीय लोगों के अनुसार बारिस की पानी कम होने के साथ मछली मारने के लिए गिद्ध दृष्टि रखने वाले कुछ अराजकतत्वों द्वारा चार बार नदी के अलग-अलग जगहों पर जहर डाला गया। इसको लेकर पर्यावरण प्रेमियों द्वारा प्रशासनिक स्तर पर शिकायत भी की गई लेकिन जिम्मेदार मौन साध लिये। अराजकतत्वों द्वारा नदी में जहर डालने से जहाँ जलीय जीवों की मौत तो हो ही रही है, गम्भीर बात यह है कि उधर प्रदूषित जल पशु-पक्षियों तक के पीने योग्य नहीं रह गया है। बताया जा रहा है कि  सोमवार/मंगलवार की रात में रामाभार पुल के पूर्व अराजकतत्वों द्वारा हिरण्ड्यवती नदी में जहर डाल दिया गया। जिसके बाद सुबह से ही मछलीयां पानी मे मरकर तैरती हुई दिखाई देने लगी। मछली खाने के शौकीन नदी में उतर गए और अवसर का लाभ उठाते हुए मर रही मछलियों को पकड़ने लगे। मछली पकड़ने की इस तरह की प्रवृत्ति को लेकर लोगों में चर्चा भी हो रही है कि मछली पकड़ने का यह तरीका प्रदूषण को ही बढ़ा रहा है और नदी को स्वच्छ बनाने के लिए पर्यावरण प्रेमियों का प्रयास असफल हो रहा है।