पाश्चात्य संस्कृति का दुष्प्रभाव संस्कारों से ही बचेगी संस्कृति : आर्यिका श्वेतमति

जैन नया मंदिर में आठ वर्ष पूर्ण होने पर हुआ प्रभु अभिषेक

 | 
पाश्चात्य संस्कृति का दुष्प्रभाव संस्कारों से ही बचेगी संस्कृति : आर्यिका श्वेतमति

अवधनामा संवाददाता

ललितपुर। पाश्चात्य संस्कृति द्वारा समाज पर दुष्प्रभाव को चिन्ताजनक बताते हुए आर्यिका श्वेतमति माताजी ने कहा संस्कार से ही संस्कृति बचेगी और जव तक संस्कृति सुरक्षित है तभी तक देश में अमन चैन संभव है। यदि जीवन में सुख शान्ति से जीना है तो बचपन से ही बच्चों को धर्म के संस्कार देने होंगे। उन्होने कहा आज घर हो या परिवार समाज हो सब जगह अशान्ति तनाव हिंसा अराजकता परस्पर घृणा व नफरत का क्यों वढ रही है क्या कभी सोचा। उन्होने कहा जैसे जैसे हम अपने धर्म केे संस्कारों से विमुख होकर पश्चिमी हवाव में गबहने लगे वैसे वैसे ही विपरीत हालात उत्पन्न हो रहे हैं इसके लिए कोई दूसरा नहीं वरन हम खुद जिम्मेवार हैं।जव बचपन में धर्म के संस्कार देने का सही समय होता है तब तो हम सो जाते हैं और पचपन में हमें धर्म कर्म याद आने लगता है। उन्होने कहा बचपन में दिया गया सुसंस्कार ही एक दिन वट वृक्ष बनता है उसी से खुशहाली शान्ति सुख सम्मान  व संस्कृति की रक्षा हो पाएगी। उन्होने कहा जो बीत गया उसे भूल जाओ और अपने वर्तमान को सुधारने के साथ ही अपने बच्चों को धर्म के संस्कार देना शुरू करो तभी धर्म की रक्षा हो सकेगी। धर्म फिर तुम्हारी रक्षा ही नहीं वरन आध्यात्मिक समृद्धि कर सकेगा। जीवन का तभी सच्चा सुख प्राप्त हो सकेगा और समाज व राष्ट्र में समरसता सदभावना और सहिष्णुता वढ सकेगी। आर्यिका श्वेतमति माताजी ने नए मंदिर में संस्कार कार्यक्रम में उक्त विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में समाजश्रेष्ठी मौजूद रहे।

चातुर्मास कलश श्रावक श्रेष्ठियों को किए वितरित

क्षेत्रपाल मंदिर में आर्यिका आदर्शमति माताजी ससंघ के सानिध्य में चातुर्मास निष्ठापन के उपरान्त मंगल कलशों का वितरण श्रेष्ठीजनो को जैन पंचायत के पदाधिकारियों द्वारा किया गया। इस मौके पर आर्यिकाश्री ने चातुर्मास के दौरान नगर के जैन अटा मंदिर में आर्यिका दुर्लभ मति माताजीजैन बडा मंदिर में आर्यिका श्वेतमति माताजी एवं वाहुवलि नगर में आर्यिका अनुभव मति माताजी के ससंघ सानिध्य में हुई प्रभावना का जिक्र किया जिसमें अनेकों श्रावक लाभान्वित हुए। कार्यक्रम के उपरान्त गाजे बाजे के साथ प्रभावना पूर्वक श्रावक अपने आवास पर मंगल कलश ले गए जहां उन्हें विधि पूर्वक स्थापित किया गया।